धार्मिक नगरी के रूप में मशहूर महाराष्ट्र (Maharashtra) का नासिक (Nashik) जिला अच्छे किस्म के प्याज (Onion) और रसीले अंगूर (Grapes) के लिए भी जाना जाता है। साग-सब्जियों के साथ ही यहां बड़े पैमाने पर बागवानी की जाती है। व्यावसायिक खेती से यहां के किसान (Farmer's) समृद्ध हुए हैं। वैसे कोरोना (Corona) की रोकथाम के लिए घोषित लॉकडाउन (lockdown) ने यहां के किसानों की कमर तोड़ दी है।
नासिक. कोरोना की रोकथाम के लिए घोषित लॉकडाउन से नासिक के किसानों की कमर तोड़ दी है। अकेले अंगूर की खेती करने वाले किसानों को ही तीन हजार करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। ट्रांसपोर्ट (Transport) बंद होने के चलते न तो अंगूर का निर्यात (Export) किया जा सका और न ही देश भर में ही इसकी सप्लाई हो पाई। इसके चलते किसान कौडिय़ों के भाव अंगूर बेचने के लिए मजबूर हो गए। सूत्रों के अनुसार अंगूर के निर्यात में एक हजार करोड़ रुपए की गिरावट आई है। अंगूर ही नहीं कृषि और कृषि आधारित उद्योगों को जोड़ लें तो अब पांच हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है।
नहीं आ रहे बाहर से व्यापारी, किसे बेचेंगे साग-सब्जी
फसल तो अच्छी है, मगर लॉकडाउन के चलते बाहर से व्यापारी यहां नहीं पहुंच रहे हैं। इस कारण स्थानीय मंडियों में कृषि उपज पहुंच तो रही है, लेकिन किसानों को भाव नहीं मिल रहा है। क्योंकि व्यापारी (wholesaler) थोक मंडियों में बहुत कम पहुंच रहे हैं। उपभोक्ता क्षेत्रों में दुकानें भी नहीं खुल रही हैं। साग-सब्जी की खेती करने वाले किसानों को 500 करोड़ का नुकसान हुआ है। मक्का, सोयाबीन, प्याज किसानों को भी लगभग 1,500 करोड़ का घाटा हुआ है।
किसान परेशान, कैसे पालेंगे परिवार
मौजूदा हालात में किसानों को परिवार का निवाला छिनने का डर सता रहा है। उनका कहना है कि तैयार उपज उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच रही है। ले-देकर हमने खेती तो कर दी, अब लागत भी नहीं निकल रही है। समझ नहीं आ रहा कि क्या करें। स्थानीय किसान सीधे उपभोक्ताओं तक कृषि उपज पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, मगर ट्रांसपोर्ट की समस्या आड़े आ रही है।