
Maharashtra News: महाराष्ट्र सरकार ने मंत्रालय में वर्षों से महत्वपूर्ण और मलाईदार पदों पर जमे अधिकारियों और कर्मचारियों पर बड़ा एक्शन लिया है। मंत्रालय और मंत्रियों के कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति, अस्थायी नियुक्ति या मौखिक आदेश के आधार पर काम कर रहे 314 अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द कर दी गई हैं। सरकार ने इन सभी को उनके मूल विभाग में वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मुख्य सचिव के निर्देश के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में जीआर जारी किया है। सरकार के इस फैसले को मंत्रालय में लंबे समय से चली आ रही ‘क्रीम पोस्टिंग’ और प्रभावशाली पदों पर कुछ अधिकारियों की पकड़ खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सरकार के निर्देश के मुताबिक, मंत्रालय और मंत्रियों के कार्यालयों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई प्रतिनियुक्ति, अस्थायी नियुक्ति या केवल मौखिक आदेश के आधार पर दी गई जिम्मेदारियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं। इन 314 अधिकारी-कर्मचारियों को 10 सितंबर 2026 तक उनके मूल कार्यालय में वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों को अपने मूल विभाग में जाकर कार्यभार संभालना होगा। उनके मूल कार्यालय में ज्वाइन करने की रिपोर्ट संबंधित कार्यालय प्रमुख और आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) को 15 सितंबर 2026 तक जमा करनी होगी। सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं।
सरकार ने आदेश में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने मूल कार्यालय में जाकर कार्यभार ग्रहण नहीं करता है, तो उसका वेतन तत्काल रोक दिया जाएगा।
इस सख्त निर्देश से मंत्रालय में प्रतिनियुक्ति या अस्थायी नियुक्ति के नाम पर लंबे समय से जमे अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच हलचल मच गई है।
पूरी कार्रवाई का अंतिम अनुपालन रिपोर्ट 20 सितंबर 2026 तक मुख्य सचिव कार्यालय को सौंपना अनिवार्य किया गया है। यानी सरकार इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी वरिष्ठ स्तर पर करेगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आदेश केवल कागजों तक सीमित न रहे।
मंत्रियों के कार्यालयों में अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय पहले ही सख्त नियम बना चुका है। इसके तहत मंत्रियों के दफ्तरों में पुराने अधिकारियों की बार-बार नियुक्ति पर रोक लगाते हुए केवल नए और पारदर्शी पृष्ठभूमि वाले कर्मियों को लाने के निर्देश दिए गए थे।
इसके अलावा मुख्यमंत्री कार्यालय की पूर्व अनुमति के बिना किसी अधिकारी की नियुक्ति नहीं की जा सकती, ऐसा नियम भी लागू किया गया था। इन नियमों के चलते कई पुराने अधिकारी पहले ही अपने मूल विभागों में लौट चुके हैं। अब शेष अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की गई है।