
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को महाराष्ट्र का नया राज्यपाल नियुक्त किया है। पूर्वोत्तर भारत के एक अनुभवी और मंझे हुए राजनेता के रूप में पहचाने जाने वाले जिष्णु देव वर्मा ने त्रिपुरा की राजनीति में दशकों तक अहम भूमिका निभाई है। अब वे देश के महत्वपूर्ण और आर्थिक रूप से समृद्ध राज्य महाराष्ट्र के संवैधानिक प्रमुख की जिम्मेदारी संभालेंगे।
जिष्णु देव वर्मा का जन्म 15 अगस्त 1957 को त्रिपुरा की राजधानी अगरतला के शाही परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद सार्वजनिक जीवन में कदम रखा और 1990 के दशक में भाजपा (BJP) में शामिल होकर अपने सक्रिय राजनीतिक सफर की शुरुआत की।
उस दौर में जब त्रिपुरा में वामपंथी (लेफ्ट) दलों का जबरदस्त वर्चस्व था, जिष्णु देव वर्मा ने राज्य के कोने-कोने में जाकर भाजपा के संगठन को मजबूत करने के लिए दिन-रात काम किया। उन्होंने 1996, 1998 और 1999 में त्रिपुरा पूर्व लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़ा, जिससे राज्य में पार्टी की नींव मजबूत हुई।
साल 2018 त्रिपुरा की राजनीति के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ था, जब भाजपा ने पहली बार वहां सरकार बनाई। इस नई सरकार में जिष्णु देव वर्मा को उपमुख्यमंत्री पद की बड़ी जिम्मेदारी दी गई। 2018 से 2023 तक उन्होंने वित्त, ऊर्जा, योजना, पंचायती राज और ग्रामीण विकास जैसे बेहद महत्वपूर्ण विभागों का नेतृत्व किया।
प्रशासन पर उनकी मजबूत पकड़ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके कार्यकाल के दौरान त्रिपुरा में आर्थिक नियोजन, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक सुधार हुए। उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसकी सराहना राष्ट्रीय स्तर पर भी हुई।
सक्रिय राजनीति और प्रशासन में उनके दीर्घकालिक अनुभव को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें संवैधानिक पदों की जिम्मेदारी सौंपी। महाराष्ट्र आने से पहले वे तेलंगाना के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।
जिष्णु देव वर्मा केवल एक राजनीतिज्ञ या प्रशासक ही नहीं, बल्कि एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति भी हैं। उन्हें साहित्य, कला और खेल क्षेत्र में गहरी रुचि है। वे एक कुशल कवि और लेखक के रूप में भी अपनी पहचान बना चुके हैं। इसके अलावा, उन्हें बैडमिंटन के खेल से गहरा लगाव है और वे कई खेल संगठनों में अहम भूमिका निभा चुके हैं।