तीन अक्‍टूबर को महाअष्‍टमी के अवसर पर कोलकाता पुलिस के एक फोन कॉल से महाराष्ट्र का सतपुते परिवार को अचंभित कर दिया। जिसे सतपुते परिवार हारकर मृत मान चुके थे उनके जिंदा होने की खबर मिली। कोलकाता से करीब 46 किमी दूर उत्‍तर 24 परगना जिला में बाबूराव बापूजी सतपुते के मिलने की सूचना पुलिस ने दी।

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिला के भेंडाला गांव की सतपुते परिवार के लिए यह दुर्गा पूजा किसी स्पेशल आशीर्वाद से कम नहीं रहा। महाराष्ट्र की इस परिवार के 73 साले के मुखिया 15 साल पहले लापता हो गए थे। परिजनों ने उनकी काफी खोज की मगर निराशा ही हाथ लगी थी। ऐसे में तीन अक्टूबर को महाअष्टमी के दिन कोलकाता पुलिस के एक फोन कॉल से पूरा परिवार अचंभित रह गया। जिसे वे अब हारकर मृत मान चुके थे, उनके जिंदा होने की खबर मिली।
कोलकाता से करीब 46 किमी दूर उत्तर 24 परगना जिला में बाबूराव बापूजी सतपुते के मिलने की सूचना पुलिस ने परिजनों को दी। जैसे ही सतपुते परिवार को ये सूचना मिली उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है। बाबूराव पहले राज्य सरकार की जॉब में थे। बाद में वे मानसिक बीमारी के शिकारी हो गए। जिसकी वजह से एक दिन वे घर से निकल गए थे। यह भी पढ़ें: Maharashtra News: महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, राज्य में बाल ठाकरे के नाम पर खुलेंगे 700 हेल्थ क्लीनिक
बता दें कि दरअसल तीन अक्टूबर को इंडियन एयरफोर्स के अधिकारी दीपांकर चटर्जी छुट्टियां मामने अपने दोस्ताें के साथ वेस्ट बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में अशोकनगर में मार्निंग वाक के लिए निकले थे। इस दाैरान उनकी नजर एक शख्स पर पड़ी, जो कचरे के ढ़ेर से खाने का सामान ढूंढ रहा था। वे उस शख्स के पास गए और उसका नाम और वे कहां रहते हैं, पूछने का प्रयास किया तो वह गुर्राने लगे। इसके बाद दीपांकर और उनके दोस्त को समझते देर नहीं लगी कि वे अपने परिवार से बिछड़ गए हैं और मानसिक बीमारी का शिकार हैं।
इसके बाद दीपांकर चटर्जी ने बाबूराव को समझा बुझाकर अपने साथ क्लब हाउस ले आए। वहां बाबूराव को अच्छे से नहलाया गया, इसके बाद उन्हें खाना-पानी, कपड़ा आदि दिया गया। उसके बाद दीपांकर चटर्जी ने वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब से संपर्क साधा। इस रेडियो क्लब का देश-विदेश में काफी बड़ा नेटवर्क है और वे ऐसे परिवार से बिछड़े लोगोंं को मिलाने में मदद करते हैं।
इस मामले में रेडियो क्लब के सचिव अंबरीश नाग विश्वास ने बताया कि बाबूराव से बातचीत कर उन्होंने जाना कि वे महाराष्ट्र से आए हैं। इसके बाद अंबरीश नाग विश्वास ने अपने महाराष्ट्र नेटवर्क से संपर्क किया। जिन्होंने भेंडाला पुलिस की मदद से बाबूराव के परिवारजनों को ढूंढ निकाला। भेंडाला पुलिस ने बताया कि परिवारजनों ने एक शिकायत दर्ज कराई थी, मगर बाबूराव को खोजने की सारी कोशिश बेकार गई थी।
फिलहाल में बाबूराव की पत्नी को पेंशन मिलने लगी थी। उनके बेटे को भी अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिल गई थी। परिवार बाबूराव के जीवित होने की खबर से काफी खुश था। परिवार ने फौरन बाबूराव की आइडेंटिटी भेजी और जल्द ही वेस्ट बंगाल पहुंचकर बाबूराव को वापस अपने घर ले जाएंगे।