
महाराष्ट्र में 608 छात्राओं ने भूत-प्रेत के डर से छोड़ा स्कूल (Photo: X/@iamvinodjagdale)
Maharashtra School Mass Hysteria: महाराष्ट्र के अमरावती जिले के आदिवासी बहुल मेलघाट इलाके में एक सरकारी आश्रम स्कूल में छात्राओं के अचानक रोने, हंसने और फिर शांत हो जाने की घटना ने पूरे गांव में दहशत फैला दी। कुछ छात्राओं को बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक हंसते हुए देखा गया, जिसके बाद स्कूल परिसर में ‘भूत’ होने की अफवाह फैल गई। डर इतना बढ़ा कि डोमा गांव स्थित आश्रम स्कूल के 608 छात्र-छात्राएं अपने घर लौट गए।
मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन और डॉक्टरों की टीम स्कूल पहुंची। चिकित्सकों ने इसे ‘मास हिस्टीरिया’ यानी Mass Psychogenic Illness (सामूहिक मनोवैज्ञानिक बीमारी) का मामला बताया। अधिकारियों के मुताबिक, तनाव और डर के कारण कई छात्रों में एक जैसी शारीरिक और मानसिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
अधिकारियों के अनुसार, यह घटना एक सप्ताह से अधिक समय पहले शुरू हुई थी। शुरुआत में करीब 16 छात्र अचानक रोने, हंसने और फिर सुन्न पड़ने लगे। कुछ छात्रों ने दावा किया कि उन्हें स्कूल परिसर में घुंघरुओं की आवाज सुनाई दी।
इसके बाद स्कूल के हॉस्टल के गलियारों से शुरू हुई अफवाह धीरे-धीरे पूरे गांव तक पहुंच गई। छात्रों और ग्रामीणों में स्कूल परिसर को लेकर डर बढ़ता गया और कई अभिभावक अपने बच्चों को वापस घर ले गए।
तालुका चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिषेक नायडू ने बताया कि छात्रों में तनाव और चिंता के कारण सामूहिक प्रतिक्रिया देखने को मिली। चिकित्सा विज्ञान में इसे मास साइकोजेनिक इलनेस (Mass Psychogenic Illness) कहा जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि ऐसी स्थिति में डर, चिंता और अफवाह तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैल सकती है। इससे कई लोगों में एक जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं, भले ही उनके पीछे कोई वास्तविक बाहरी कारण न हो।
इस घटना ने सरकारी आश्रम स्कूल की लंबे समय से चली आ रही व्यवस्थागत समस्याओं को भी सामने ला दिया है। आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, स्कूल में छात्रों के लिए पर्याप्त जगह की कमी, कमरों में भीड़, भोजन की खराब गुणवत्ता और साफ-सफाई की समस्या जैसी शिकायतें सामने आई हैं।
अधिकारियों ने यह भी माना कि छात्रों के लिए समय पर काउंसलिंग की व्यवस्था नहीं थी। शुरुआती घटना के बाद तत्काल प्रभावी प्रतिक्रिया नहीं मिलने से डर और अफवाहों को फैलने का मौका मिला।
कुछ अभिभावकों ने दावा किया कि स्कूल परिसर में महुआ का पेड़ काटे जाने के बाद यह घटना शुरू हुई। हालांकि, स्कूल के प्रधानाध्यापक संजय चौधरी ने इस दावे को खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि संबंधित पेड़ करीब छह साल पहले ही काटा गया था, इसलिए हाल की घटना को उससे जोड़ना सही नहीं है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए गुरुवार को राज्य की आदिवासी आयुक्त लीना राठौड़ ने डोमा गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन की ओर से छात्रों और ग्रामीणों को घटना के वास्तविक कारणों के बारे में समझाने का प्रयास किया जा रहा है।
अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की एक टीम भी स्कूल पहुंची और छात्रों की काउंसलिंग की। संगठन की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य गणेश हळकरे ने बताया कि मेलघाट में अंधविश्वास के खिलाफ व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है।
फिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कोशिश छात्रों के डर को दूर करने और उन्हें सुरक्षित माहौल में वापस स्कूल लाने की है। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि अफवाह और अंधविश्वास किस तरह किसी सामान्य घटना को लेकर बड़े पैमाने पर डर पैदा कर सकते हैं।
Updated on:
16 Aug 2026 10:15 am
Published on:
16 Aug 2026 10:15 am
