सत्ता के संघर्ष में भाजपा ( BJP ) को झटका देकर राज्य में युति से बाहर हुई शिवसेना ( Shiv Sena ) ने अब केंद्र की एनडीए (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन) से भी बाहर होने का ऐलान किया है। शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ( sanjay Raut ) ने स्पष्ट किया कि शिवसेना अब एनडीए ( NDA ) की बैठक में शामिल नहीं होगी।
मुम्बई. शिवसेना के सांसदआगामी लोकसभा शीतकालीन सत्र से पहले एनडीए की आयोजित होने वाली बैठक में हिस्सा नहीं लेगी। शनिवार को मीडिया को दिए बयान में राउत ने स्पष्ट किया कि युति और एनडीए को हमने नहीं तोड़ा है। लेकिन भाजपा से शिवसेना वास्तव में दुखी है। भाजपा नेताओं के झूठे वादे के चलते शिवसेना आहत हुई है। राउत ने कहा कि एनडीए के संस्थापक सदस्यों में शिवसेना थी, लेकिन अब वे पुराने लोग नहीं रहे, ऐसे में शिवसेना की बातों का भी एनडीए महत्व नहीं रह गया है। एनडीए से नाता तोडऩे की सिर्फ औपचारिक घोषणा बाकी है। एनडीए से दूर होने का हमारे पास राज्य की राजनीतिक स्थितिभी एक कारण है।
Patrika .com/political-news/bjp-3-days-meeting-over-devendra-fadanvis-says-we-will-form-government-5374063/" target="_blank">बीजेपी की तीन दिवसीय बैठक खत्म, सरकार बनाने को लेकर फडणवीस ने कही बड़ी बात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शाह को शिवसेना नहीं समझ सकी इस तरह का बयान देने वाले भाजपा नेता आशीष शेलार पर पलटवार करते हुए शिवसेना नेता राउत ने कहा कि मोदी समझने के लिए शिवसेना को कोई नहीं सिखाए। शिवसेना नेता राउत के इस बयान से एनडीए को भी झटका लगा है। पिछले 20 दिनों से राज्य में सत्ता को लेकर संग्राम जारी है। विधानसभा चुनाव के नतीजेआने के साथ ही मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा शिव सेना में खींचतान मच गई। दोनों के बीच दरार इतनी बढ़ गई की शिवसेना ने युति से अलग होकर राज्य में नए राजनीतिक समीकरण को साकार किया है। शिवसेना पहली बार कांग्रेस एनसीपी के साथ जाकर महाशिव अघाड़ी गठबंधन को जन्म दिया है।
शिवसेना नेता विनायक राउत ने भी कहा कि एनडीए में अब शिवसेना के लिए कुछ बचा नहीं है। भाजपा को छोड़कर एनडीए के अन्य प्रमुख दल व नेताओं के साथ बातचीत हुई। शिवसेना अब और नही रहेगी। शिवसेना को कांग्रेस एनसीपी के साथ जाने और सरकार बनाने के विषय पर शिवसेना नेता अनिल परब ने कहा कि भाजपा ने दगा दिया है। हमने तब भी कहा था और आज भी कहते हैं कि भाजपा अपने वादे से मुकर गई है। कम से कम भाजपा तो हमे युतिधर्म का ज्ञान ना बांटे। हमें पता है जो लोग राम की बात करते है और राम से सीखते भी नहीं है वे हमें ना सिखाएं तो बेहतर है।