
Maratha Andolan: महाराष्ट्र की राजनीति में मराठा आरक्षण का मुद्दा जोर-शोर से उठ रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष शरद पवार ने मंगलवार को कहा कि मराठा आरक्षण देने के लिए संविधान में संशोधन किया जाना चाहिए। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नीत सरकार की आलोचना की है।
एनसीपी प्रमुख ने महाराष्ट्र के जलगांव जिले में एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा, मराठा समुदाय को ओबीसी के कोटे से आरक्षण देना सही नहीं होगा... ओबीसी समाज के मौजूदा आरक्षण कोटे में मराठा समुदाय की हिस्सेदारी बनाना अनुचित है। ओबीसी के वर्तमान आरक्षण कोटे में बंटवारा करना ओबीसी समाज के साथ अन्याय होगा। इसे नजरअंदाज करने से काम नहीं चलेगा। यह भी पढ़े-महाराष्ट्र: APMC चुनाव में बीजेपी और महायुति ने मारी बाजी, केसीआर की BRS का भी खुला खाता
वरिष्ठ नेता ने आगे कहा, मराठा आरक्षण देने के लिए एक विकल्प यह है कि मौजूदा आरक्षण सीमा जो 50 फीसदी है, उसमें बदलाव किया जाए। यदि संसद में संशोधन के माध्यम से अतिरिक्त 15 से 16 प्रतिशत आरक्षण उपलब्ध कराया जाता है, तो मराठा आरक्षण का मुद्दा हल हो सकता है। हालांकि, शरद पवार ने कहा कि अगर कोई इस मुद्दे पर मराठा और ओबीसी समुदाय के बीच विवाद पैदा करना चाहता है, तो समर्थन नहीं किया जाएगा।
देश का नाम बदलने का अधिकार किसी को नहीं- पवार
इस दौरान शरद पवार ने कहा कि किसी को भी देश का नाम बदलने का अधिकार नहीं है। उनकी यह टिप्पणी कांग्रेस के उस दावे के बाद आई है कि जी-20 डिनर के निमंत्रण में राष्ट्रपति को ‘प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया’ की जगह ‘प्रेसिडेंट ऑफ भारत’ कहकर संबोधित किया गया है।
शरद पवार ने कहा, ‘‘मुझे समझ नहीं आता कि सत्तारूढ़ दल देश से संबंधित नाम को लेकर क्यों परेशान है।’’ उन्होंने कहा, संविधान में ‘इंडिया’ का नाम बदला जाएगा या नहीं मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हालाँकि पवार ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी दलों के प्रमुखों की बैठक बुलाई है। उन्होंने कहा, ‘‘बैठक में इस पर चर्चा होगी, लेकिन देश का नाम बदलने का अधिकार किसी को नहीं है। कोई भी नाम को नहीं बदल सकता।’’
बता दें कि जी-20 शिखर सम्मेलन भारत की अध्यक्षता में 9 से 10 सितंबर तक राजधानी दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन सहित दुनियाभर के कई राष्ट्राध्यक्ष इसमें हिस्सा लेंगे।