मुंबई

महाराष्ट्र में इस साल लंपी वायरस बना मवेशियों की जान का दुश्मन, 11 हजार से ज्यादा काल के गाल में समाएं

Lumpy Skin Disease: महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी किये गए अधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में इस साल शुरू के 10 महीनों में कम से कम 1,78,072 मवेशी लंपी त्वचा रोग की चपेट में आये थे।

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Dec 28, 2022
महाराष्ट्र में फिर पांव पसार रहा लंपी वायरस

Maharashtra Lumpy Virus News: महाराष्ट्र में लंपी वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे है। राज्य के कम से कम 33 जिलों में लंपी बीमारी का कहर सबसे अधिक देखने को मिला है, जहां हजारों संक्रमित मवेशियों की मौत हुई है। ताजा जानकारी के मुताबिक, राज्य में लंपी वायरस से कुल 1 लाख 78 हजार 072 मवेशियों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है और यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।

महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी किये गए अधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में इस साल शुरू के 10 महीनों में कम से कम 1,78,072 मवेशी लंपी त्वचा रोग की चपेट में आये थे। जबकि अक्टूबर तक उनमें से 11,547 मवेशियों की मौत हुई है। राज्य के कुल 36 जिलों में से 33 जिलों की 291 तहसीलों में लंपी त्वचा रोग के कारण मवेशियों की जान गई है। यह भी पढ़े-महाराष्ट्र के 33 गांवों में फैला लंपी वायरस, 22 से अधिक मवेशियों की मौत, 1224 संक्रमित


1.39 करोड़ मवेशियों को लगी वैक्सीन

महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटिल ने मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान विधान परिषद में कहा कि लंपी बीमारी से बचाव के लिए लगभग 1.39 करोड़ मवेशियों को 'गोट पॉक्स-वायरस' की वैक्सीन लगाई गई। चौकादेने वाली बात यह है कि राज्य के 1 करोड़ 39 लाख 92 हजार 304 मवेशियों में से 2.71 फीसदी मवेशी लंपी वायरस से संक्रमित हुए थे।

मुआवजा बढ़ाने की मांग!

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के दिशा-निर्देशों के अनुसार लंपी रोग से जान गंवाने वाले प्रति मृत गाय के लिए किसानों को 30 हजार रुपये, मृत बैल के लिए 25 हजार रुपये और मृत बछड़े के लिए 16 हजार रुपये का मुआवजा दिया गया। हालांकि विधान परिषद में मांग की गई कि लंपी रोग की वजह से अपने मवेशियों को खोने वाले किसानों का कर्ज माफ किया जाए या मुआवजा बढ़ाई जाए।

बता दें कि लंपी वायरस मवेशियों में गंभीर त्वचा रोग का कारण बनता है। संक्रामक रोग होने के कारण यह एक पशु से दूसरे पशु में आसानी से फैलता है। इससे पीड़ित मवेशियों में बुखार, त्वचा पर चकत्ते (गांठ) और दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण होते हैं।

Published on:
28 Dec 2022 12:02 pm
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