मुंबई

आप किससे बात करते हैं, कहां जाते हैं, सब बिक रहा था! मुंबई में कॉल रिकॉर्ड बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश, पुलिसकर्मी समेत 9 लोग गिरफ्तार

Call Detail Records: मुंबई में लोगों की कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन बेचने वाले कथित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। आरोप है कि 5 हजार रुपये लेकर पति-पत्नी और दूसरे लोगों की निजी जानकारी जुटाई जाती थी। मामले में सात आरोपी गिरफ्तार हुए हैं, जबकि दो पुलिस कांस्टेबलों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
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Oct 10, 2026
Call Records Selling Gang
पैसे लेकर लोगों की जासूसी कर रहा था गिरोह, पुलिसकर्मी समेत 9 लोग गिरफ्तार (फोटो सोर्स-@PoliceMahanagar)

Crime Branch: आप किससे फोन पर बात करते हैं, कहां जाते हैं और किन लोगों से मिलते हैं, आपकी ऐसी निजी जानकारी भी पैसों के बदले हासिल की जा रही थी। मुंबई क्राइम ब्रांच ने गोपनीय मोबाइल डेटा बेचने वाले एक कथित गिरोह का पर्दाफाश किया है। मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि झारखंड और बिहार में तैनात दो पुलिस कांस्टेबलों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि गिरोह कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल लोकेशन और अन्य गोपनीय जानकारी के जरिए लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करता था।

सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन और बिछाया गया जाल

इस पूरे खेल का भंडाफोड़ सोशल मीडिया पर दिखे एक विज्ञापन से हुआ। इस विज्ञापन में दावा किया जा रहा था कि पैसे देकर खोए या चोरी हुए मोबाइल आसानी से ढूंढे जा सकते हैं। जब अधिकारियों ने इसकी पड़ताल की, तो पता चला कि 'इंस्पेक्टर संजय' बनकर एक शख्स लोगों से संपर्क कर रहा था।
क्राइम ब्रांच की टीम ने ग्राहक बनकर आरोपी से संपर्क किया और जोगेश्वरी इलाके में मिलने का समय तय किया। जैसे ही आरोपी हंजाला मुबारक सैयद मौके पर पहुंचा, पुलिस ने उसे धर दबोचा। उसके मोबाइल की जांच से पूरे गिरोह का कच्चा-चिट्ठा बाहर आ गया।

झारखंड-बिहार के सिपाही करते थे मदद

जांच में खुलासा हुआ कि इस गिरोह में कुल 9 लोग शामिल थे। डेटा हासिल करने का तरीका बेहद चौंकाने वाला था। झारखंड के धनबाद में तैनात सिपाही पंकज कुमार और बिहार के वैशाली में तैनात सिपाही प्रिंस कुमार इस सिंडिकेट को गोपनीय डेटा सप्लाई करते थे।
ये सिपाही टेलिकॉम कंपनियों से किसी भी आम व्यक्ति के 'कॉल डिटेल रिकॉर्ड' (CDR) और 'सब्सक्राइबर डिटेल रिकॉर्ड' (SDR) मंगवाने के लिए फर्जी आपराधिक केस का हवाला देते थे। डेटा मिलने के बाद बिचौलिए इसे ग्राहकों तक पहुंचाते थे।

किस काम के लिए बिकता था डेटा?

यह गिरोह अलग-अलग कामों के हिसाब से रेट तय करता था-

  • वैवाहिक विवाद और शक: पति या पत्नी के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर पर नजर रखने के लिए आरोपी 5,000 रुपये तक वसूलते थे।
  • बिजनेस में दुश्मनी: बिजनेसमैन अपने विरोधियों और कर्मचारियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए यह डेटा खरीदते थे।
  • कर्मचारियों पर नजर: एक जगह तो हद ही हो गई; एक कारोबारी के यहां जब जीएसटी की रेड पड़ी, तो उसने यह पता लगाने के लिए सबका कॉल रिकॉर्ड निकलवा लिया कि रेड की खबर लीक किसने की थी।

पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया?

पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र, झारखंड और बिहार से आरोपियों को दबोचा है। छापेमारी के दौरान पुलिस को 50 कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), 520 से ज्यादा सब्सक्राइबर डिटेल्स (SDR), 550 मोबाइल लोकेशन व ट्रैकिंग रिकॉर्ड, 420 IMEI नंबर के डिटेल्स और 7 मोबाइल फोन मिले।

सख्त धाराओं में मामला दर्ज

मामले की गंभीरता को देखते हुए ओशिवारा पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (धोखाधड़ी), 319 (प्रतिरूपण करके धोखाधड़ी), 204 (लोक सेवक का प्रतिरूपण), 223 (लोक सेवक द्वारा जारी वैध आदेश की अवज्ञा), 351 (आपराधिक धमकी), 112 (छोटे संगठित अपराध) और 238 (सबूत गायब करना) के तहत FIR दर्ज की गई है।

Updated on:
10 Oct 2026 11:59 am
Published on:
10 Oct 2026 11:24 am