
बिनोद पाण्डेय
मुंबई. सिद्धिबुद्धि पते नाथ सिद्धिबुद्धिप्रदायिने, मायिन मायिकेभ्यश्च मोहदाय नमो नम:॥ अर्थात, नाथ! आप सिद्धि और बुद्धि के पति हैं तथा सिद्धि और बुद्धि प्रदान करने वाले हैं। माया के अधिपति और मायावियों को मोह में डालने वाले हैं। आपको बारम्बार नमस्कार है। मुंबई के वडाला क्षेत्र में किंग सर्कल के समीप गौड़ सारस्वत ब्राह्मण (जीएसबी) सेवा मंडल की ओर से स्थापित 14 फीट ऊंची गणपति प्रतिमा देखने पर ऐसे ही भावों का अहसास श्रद्धालुओं होता है। इस बार गणपति को 20 करोड़ के सोने के आभूषणों से सजाया गया है। गहनों से उनके दिव्य मुखमंडल की आभा और शोभा और बढ़ गई है। बप्पा की एक झलक देखने के लिए हजारों श्रद्धालु आतुर हैं। दक्षिण भारत की परंपरागत तौर-तरीकों से आरती करते पुजारी भी महाराष्ट्र में अलग और अनूठी आस्था का अनुभव कराते हैं। यही कारण है कि मूसलाधार बारिश के बावजूद घंटों कतार में सपरिवार खड़े श्रद्धालु उफ तक नहीं करते। एक दर्शन से मन नहीं भरता तो दोबारा कतार में खड़े होने को सौभाग्य समझते हैं। मूल सारस्वत समाज कोंकणभाषियों का मुंबई में यह सबसे पुराना गणेश मंडल है।
गणपति के साथ सबका करोड़ों का बीमा
मूर्ति की देश भर मेें चर्चा का बड़ा कारण 266.65 करोड़ रुपए का बीमा कराना भी है। इसके अलावा करोड़ों रुपए के आभूषणों की निगरानी के लिए 100 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। चार हजार 500 सुरक्षाकर्मी मंडल कार्यकर्ताओं के साथ व्यवस्था में तैनात हैं। जीएसबी मंडल पंडाल, मूर्ति, आभूषण, स्वयंसेवकों और श्रमिकों तक के लिए बीमा करवाता है। यहां तक कि फलों, सब्जियों और किराने के 2,200 से अधिक सामानों और मंडल के लिए काम करने वाले श्रमिकों व स्वयंसेवकों को बीमे में कवर करता है। स्वयंसेवकों और अन्य लोगों के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना कवर 224.90 करोड़ रुपए का है, जो कुल बीमा धन का सबसे बड़ा हिस्सा है।
68 वर्ष पुराना है जीएसबी मंडल
गौड़ सारस्वत ब्राह्मण सेवा मंडल की शुरुआत 1951 में हुई थी। इस बार का पंंडाल 70 हजार वर्ग फीट से ज्यादा का है। सबसे बड़ी खासियत मुख दर्शन व्यवस्था है, जिसके लिए अस्थायी पुल बनाया गया है। श्रद्धालु इस पर कतारबद्ध होकर आगे बढ़ते हुए दर्शन करते हैं, दूसरी व्यवस्था कूपन के जरिए है, एक निश्चित राशि जमा कर श्रद्धालु इसके सहारे गणपति के समक्ष जाकर दर्शन करते हैं।