
CJP Protest का वीडियो देख रो पड़ीं अभिजीत दीपके की मां
Abhijeet Dipke: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान पुलिस की लाठीचार्ज के बाद लोगों में आक्रोश है। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के रहने वाले अभिजीत दीपके का परिवार भी प्रदर्शनकारियों पर हुए बल प्रयोग के वीडियो देखकर गहरे सदमे में है। उनकी मां अनीता दीपके पुलिस की कार्रवाई के दौरान अभिजीत दीपके की तबीयत बिगड़ने और अभ्यर्थियों पर हुए बल प्रयोग का वीडियो देख रो पड़ीं। पुलिस की कार्रवाई को अमानवीय बताते हुए उन्होंने सरकार के रवैये पर सवाल उठाए।
दिल्ली में संसद मार्च के दौरान हुए लाठीचार्ज को लेकर मिडिया से बात करते हुए अनीता दीपके ने कहा, "बहुत बुरा हुआ है, ऐसा लाठीचार्ज नहीं होना चाहिए था। ये बच्चे एक महीने से शांति से वहां बैठे थे, उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया था। जब मैंने अपने फोन पर देखा कि अभिजीत को चक्कर आ रहा था और वह गिर गया था, तो मैं रोने लगी। इस ठंडे और बारिश वाले मौसम में इन युवाओं को खून निकलने तक पीटा गया, इस देश में आतंकवादियों के साथ भी उतना बुरा बर्ताव नहीं किया जाता जितना पुलिस ने इन छात्रों के साथ किया है।"
बोस्टन यूनिवर्सिटी से अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद भारत लौटने के बेटे के फैसले के बारे में अनीता दीपके ने कहा, "अमेरिका में उसका करियर सेट हो चुका था और वह एक शानदार जिंदगी जी रहा था। मैंने उससे कहा था कि बेटा, बस वहीं अच्छी नौकरी करो, भारत आकर विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने का कोई मतलब नहीं है। लेकिन उसने मेरी बात नहीं मानी, वह छात्रों के अधिकारों के लिए लड़ने वापस आ गया। वह एक सीधा-सादा इंसान है, कोई चालाक राजनेता नहीं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि वह इतने बड़े आंदोलन का नेतृत्व करेगा।"
अभिजीत की मां ने बताया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई कार्रवाई के बाद से पूरा परिवार मानसिक तनाव में है। अनीता दीपके ने बताया कि डर के कारण, कल संसद मार्च के दौरान उन्होंने पूरे दिन अपना मोबाइल फोन तक नहीं छुआ, क्योंकि उन्हें कोई बुरी खबर सुनने का डर था। उन्होंने आगे बताया कि इस घटना के बाद तनाव के कारण अभिजीत के पिता भगवानराव दीपके का ब्लड प्रेशर काफी गिर गया।
कॉकरोच जनता पार्टी की मांगों का समर्थन करते हुए अनीता दीपके ने कहा कि सरकार की जिद देश के युवाओं का भरोसा खत्म कर रही है। उन्होंने कहा कि लाठीचार्ज कभी भी भारत का भविष्य नहीं हो सकता, ये बच्चे ही देश का असली भविष्य हैं। जब सरकार सड़कों पर अपने ही बच्चों को इस तरह पीटती है और डेढ़ महीने से परेशान छात्रों की मांगों पर ध्यान देने से इनकार करती है, तो इन मासूम बच्चों के पास हार मानने के अलावा क्या विकल्प बचता है?
Updated on:
21 Jul 2026 09:39 pm
Published on:
21 Jul 2026 09:17 pm
