Indian Railway IRCTC: रेल यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव प्रदान करने की दिशा में रेलवे कई कदम उठा रहा है।
CSMT-Nagpur Sevagram Express: मुंबई-नागपुर सफर करने वाले रेल यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। मध्य रेलवे ने सीएसएमटी-नागपुर सेवाग्राम एक्सप्रेस में एलएचबी कोच लगाने की घोषणा की है। इससे राज्य के दो प्रमुख शहरों के बीच का सफर न केवल आरामदायक होगा, बल्कि पहले से अधिक सुरक्षित भी होगा। इससे पहले रूट की कई अन्य गाड़ियों में भी एलएचबी कोच लगाए गए है।
भारतीय रेलवे में 2 तरह के कोच सेवाएं दे रहे हैं। ये ICF (Integral Coach Factory) और LHB (Linke Hofmann Busch) हैं। एलएचबी कोच के डिब्बे लाल रंग और के डिब्बे लगे होते हैं। जबकि इंटीग्रल कोच फैक्ट्री यानी आईसीएफ कोच के डिब्बे नीले रंग के होते है। यह भी पढ़े-‘विश्व धरोहर’ बनेंगे छत्रपति शिवाजी महाराज के ये किले, यूनेस्को को भेजा जाएगा नाम
क्या है एलएचबी?
आईसीएफ कोच स्टील और एलएचबी कोच स्टेनलेस स्टील से बने होते हैं। धीरे-धीरे पुराने हो चुके आईसीएफ कोच को सेवा से हटाया जा रहा है। उनकी जगह ट्रेनों में एलएचबी कोच जोड़े जा रहे है, जिसकी कोडल लाइफ 30 साल होती है। लिंके हॉफमैन बुश (एलएचबी) कोच जर्मनी के लिंके-हॉफमैन-बुश द्वारा विकसित एक यात्री कोच है।
रेलवे प्रशासन द्वारा यात्रियों की सुविधा हेतु मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस और नागपुर के बीच चलने वाली सेवाग्राम एक्सप्रेस के आईसीएफ रेक को एलएचबी रेक में बदलने का निर्णय लिया गया है।
12 डिब्बे AC-3 इकोनॉमी कोच के होंगे
12140 नागपुर-सीएसएमटी सेवाग्राम एक्सप्रेस का पहला रैक नागपुर से एलएचबी कोचों के साथ इसी साल 25 मई को जबकि 12139 सीएसएमटी-नागपुर सेवाग्राम एक्सप्रेस 26 मई से चलेगी। वहीँ, 12140 नागपुर-सीएसएमटी सेवाग्राम एक्सप्रेस का दूसरा रैक नागपुर से एलएचबी कोचों के साथ 26 मई से और 12139 सीएसएमटी-नागपुर सेवाग्राम एक्सप्रेस 27 मई 2024 से चलेगी।
सेवाग्राम एक्सप्रेस में अब कुल 22 डिब्बों के साथ पटरियों पर दौड़ेगी। जिसमें दो एसी-2 टियर, 12 एसी-3 टियर इकोनॉमी, 4 स्लीपर क्लास, गार्ड की ब्रेक वैन और एक जेनरेटर वैन सहित तीन सामान्य द्वितीय श्रेणी के डिब्बे शामिल है।
सुरक्षित, आरामदायक और सुविधाजनक होगी यात्रा-
• आईसीएफ कोचों की तुलना में हल्के और लंबे
• बेहतर गति
• पटरी से उतरने की स्थिति में वे बगल वाले डिब्बे पर नहीं चढ़ते
• बैठने की क्षमता में वृद्धि
• बेहतर एयर कंडीशनिंग
• बायो टॉयलेट से सुसज्जित
• उच्च गति पर कुशल ब्रेकिंग
• किफायती और कम रखरखाव लागत।