ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। अब महज 40 रुपए के इंजेक्शन से ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों की जान बचाई जा सकती है। इस स्टडी की शुरूआत और डिजाइन टाटा मेमोरियल अस्पताल समूह के डायरेक्टर डॉ राजेंद्र बडवे ने किया था। इस स्टडी के परिणाम को सोमवार को पेरिस में हुए कैंसर सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया, जिसकी सराहना की गई।
ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। कैंसर के इलाज को प्रभावी, सरल और आम नागरिकों के लिए आसान बनाने की दिशा में टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल हमेशा आगे रहा है। इस बीच ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में हॉस्पिटल को एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। यहां के रिसर्चर ने एक ऐसे इंजेक्शन की खोज की है, जिसके एक डोज से ब्रैस्ट कैंसर के सेल्स सुन्न (स्थिर) हो जाएंगे और शरीर के अन्य हिस्सों में इन सेल्स को बढ़ने से रोका जा सकेगा।
आम लोगों के लिए अच्छी बात यह है कि इस इंजेक्शन के एक डोज की कीमत महज 30 से 40 रुपए है। ब्रेस्ट कैंसर रोगियों के उपचार की दिशा में इसे एक वरदान के रूप में देखा जा रहा है। साल 2011 में टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल ने ब्रेस्ट कैंसर मरीजों के उपचार पर एक नई स्टडी की शुरुआत की थी। 'इफेक्ट ऑफ पेरी- टुमोरल इंफिल्ट्रेशन ऑफ लोकल एनेस्थेटिक प्रायर टू सर्जरी ऑन सरवाइवल इन अर्ली ब्रेस्ट कैंसर' के शीर्षक के तहत की गई। इस स्टडी में देश के 11 कैंसर सेंटर शामिल थे। यह भी पढ़ें: Maharashtra News: स्टूडेंट ने किया NEET रिजल्ट में बड़ी गड़बड़ी का दावा, पहली बार चेक किया तो 570 नंबर थे; दूसरी बार देखा तो 129
बता दें कि आमतौर पर सर्जरी करते समय कैंसर सेल्स खुद को जिंदा रखने के लिए शरीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्सों में एक चैनल के जरिए घुस जाते हैं, लेकिन नए रिसर्च में शोधकर्ताओं ने महज एक इंजेक्शन द्वारा सेल्स को बढ़ने से रोकने में कामयाबी हासिल की है। मेडिकल ऑन्कोलॉजी के प्रफेसर व एक्टरेक के निदेशक डॉ सुदीप गुप्ता ने बताया कि कैंसर के प्रभावित हिस्सों को सुन्न करने के लिए लोकल एनेस्थीसिया किया जाता है। इस एनेस्थीसिया के लिए डॉक्टरों ने लिडोकैन इंजेक्शन का उपयोग किया है। सर्जरी शुरू करने से पहले इस इंजेक्शन को ट्यूमर के चारों तरफ दिया जाता है। इस इंजेक्शन का फायदा यह दिखा कि कैंसर सेल्स पूरी तरह से सुन्न हो गए और शरीर के दूसरे हिस्सों में इसका प्रसार नहीं हो पाया।
दूसरी तरफ डॉ राजेन्द्र बडवे ने दावा किया है कि ब्रैस्ट कैंसर के इलाज में इस उपचार प्रणाली का उपयोग पूरे वर्ल्ड में किया गया। जिससे हर साल एक लाख लोगों की जान बचाई जा सकती है। डॉ सुदीप गुप्ता ने बताया कि इस इंजेक्शन के उपयोग से क्योर रेट में पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आमतौर पर सर्जरी के बाद 81 प्रतिशत ब्रेस्ट कैंसर मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। इस इंजेक्शन के बाद ब्रेस्ट कैंसर मरीजों के ठीक होने का प्रमाण 86 प्रतिशत हो गया है।
डॉ राजेंद्र बड़वे ने बताया कि इस नई उपचार प्रणाली पर स्टडी करीब 11 सालों से जारी है। इस स्टडी के लिए 30 से 70 आयु वर्ग की 1600 महिलाओं को चुना गया था, जिसे दो ग्रुप में बांटा गया। 800 महिलाओं के ब्रेस्ट कैंसर का ट्रीटमेंट महज सर्जरी करके किया गया, जबकि दूसरे ग्रुप की 800 महिलाओं का इलाज इंजेक्शन के साथ सर्जरी करके किया गया। दोनों समूह की महिलाओं का नियमित फॉलो अप किया गया। इनका प्रोटोकॉल केमो, रेडिएशन आदि किया गया। फॉलो अप के 6वें साल में इंजेक्शन का उपयोग किए गए मरीजों की जान बचाने में 30 प्रतिशत का सुधार दर्ज हुआ है।