मुंबई

Mumbai Watermelon Death Case: अब्दुल्ला को था किडनी रोग, पत्नी थायरॉइड से पीड़ित; रात में हालत बिगड़ते ही किसे किया कॉल?

Mumbai Watermelon Death Case: मुंबई के पायधुनी में एक परिवार के 4 सदस्यों की मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए जेजे अस्पताल की टीम मेडिकल और साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी करेगी। शुरुआती डॉक्टर की भूमिका की भी जांच होगी।

2 min read
May 09, 2026
पत्रिका फोटो

Mumbai Watermelon Death Case: मुंबई के पायधुनी इलाके में डोकाडिया परिवार के चार सदस्यों की संदिग्ध मौत ने पूरी मुंबई को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना की लगातार जांच की जा रही है और आए दिन नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। 'महाराष्ट्रा टाइम' की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस जांच में अब यह बात सामने आई है कि परिवार के मुखिया अब्दुल्ला किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे और इसके लिए आयुर्वेदिक दवाएं ले रहे थे, जबकि उनकी पत्नी थायराइड से पीड़ित थीं। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल उस 'पहले कॉल' को लेकर उठ रहा है, जो रात में हालत बिगड़ने पर परिवार की ओर से किया गया था।

रात को तरबूज खाने के बाद जब परिवार के चारों सदस्यों की तबीयत खराब होने लगी, तो अब्दुल्ला की पत्नी ने सबसे पहले एक स्थानीय डॉक्टर से संपर्क किया था। अब जांच का मुख्य केंद्र यह है कि क्या उस डॉक्टर ने उन्हें तुरंत अस्पताल जाने की सलाह दी थी और यदि नहीं, तो क्यों? पुलिस अब उस डॉक्टर की डिग्री और उसकी पैथी की भी जांच कर रही है। जेजे अस्पताल प्रशासन अब फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और माइक्रोबायोलॉजी विभाग की रिपोर्टों का संयुक्त अध्ययन कर रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि मौत की असली वजह कोई जहरीला पदार्थ था, दवाओं का रिएक्शन या कुछ और।

ये भी पढ़ें

मुंबई तरबूज-बिरयानी कांड: वाटरमेलन में किसने मिलाई चूहे मारने की दवा? फल विक्रेताओं पर भी शक

'साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी' का लिया जाएगा सहारा

जब मौत की वजह (आत्महत्या, दुर्घटना या हत्या) स्पष्ट नहीं होती, तब जांच एजेंसियां 'मानसिक शवविच्छेदन' (Psychological Autopsy) तकनीक का इस्तेमाल करती हैं। इस प्रक्रिया में मृतक के शरीर के बजाय उसकी मानसिक स्थिति, पिछले कुछ दिनों के व्यवहार और मन के विचारों की गहराई से पड़ताल की जाती है। डोकाडिया परिवार के मामले में भी इसी तकनीक के जरिए यह समझने की कोशिश की जाएगी कि उनके मन में आखिर क्या चल रहा था।

क्या था मामला?

गौरतलब है कि मुंबई का चर्चित 'तरबूज-बिरयानी कांड' पिछले अप्रैल के महीने में 26 तारीख को दक्षिण मुंबई के पायधुनी इलाके में हुआ था, जहां एक ही परिवार के चार सदस्यों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। शुरुआती जांच में इसे तरबूज खाने से हुई फूड पॉइजनिंग माना जा रहा था, लेकिन फॉरेंसिक रिपोर्ट (7-8 मई) ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि उनके शरीर में जिंक फॉस्फाइड (चूहे मारने वाला जहर) मौजूद था। डॉक्टरों ने पाया कि जहर के असर से पीड़ितों के आंतरिक अंगों का रंग हरा पड़ गया था। फिलहाल पुलिस इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि यह जहर किसी साजिश, दुर्घटना या आत्महत्या का परिणाम था।

Published on:
09 May 2026 11:06 am
Also Read
View All