इस्तीफा देने वाले एनसीपी नेताओं ने सीधे तौर पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे को निशाने पर लिया है। उनका कहना है कि पार्टी के भीतर उनकी अनदेखी की जा रही है।
महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर चल रहा असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी में सम्मान और उचित सहयोग नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए एक और प्रदेशाध्यक्ष ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
महानगरपालिका कर्मचारी संगठन महाराष्ट्र राज्य के प्रदेशाध्यक्ष गौतम खरात ने अपने पद के साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी के अंदरूनी हालात को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। खास तौर पर एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने से पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष की तस्वीर सामने आ रही है।
गौतम खरात ने अपने इस्तीफे में साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने लंबे समय तक निष्ठा के साथ पार्टी के लिए काम किया, लेकिन प्रदेश स्तर से उन्हें अपेक्षित मार्गदर्शन और सहयोग नहीं मिला।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में केवल कुछ चुनिंदा लोगों और उनके रिश्तेदारों को ही महत्व दिया जा रहा है। पद और सम्मान भी उन्हीं तक सीमित हैं। जो कार्यकर्ता जमीन पर रहकर काम करते हैं, उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। आम कार्यकर्ताओं के साथ हो रहे इस व्यवहार से आहत होकर उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया।
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें 26 जनवरी को हुई हलचल में छिपी हैं। उस समय सुनील तटकरे की कार्यशैली से नाराज कुछ सेल के प्रदेशाध्यक्षों ने तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार को अपने इस्तीफे सौंपे थे। बताया जाता है कि उस समय अजित पवार ने ये इस्तीफे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था और सभी पदाधिकारियों को चर्चा के लिए मुंबई बुलाया था।
हालांकि, 28 जनवरी को बारामती में विमान क्रैश होने से अजित पवार का निधन हो गया और इससे पार्टी के समीकरण पूरी तरह बदल गए। उनके सक्रिय रहते जो इस्तीफे खारिज कर दिए गए थे, अब अजित दादा के जाने के महज डेढ़ महीने के भीतर ही इन पदाधिकारियों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
गौतम खरात का इस्तीफा इस पूरे घटनाक्रम का अकेला मामला नहीं है। उनसे पहले भी कई बड़े नेताओं ने संगठन से दूरी बनाई है। राष्ट्रवादी मोटर मालिक परिवहन सेल के प्रदेश अध्यक्ष सचिन जाधव, उद्योग विभाग के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष मालवनी और असंगठित श्रम विभाग के प्रदेश अध्यक्ष मनोज व्यवहारे भी अपने इस्तीफे सौंप चुके हैं। इन सभी नेताओं ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे।
एक तरफ अजित पवार के निधन के बाद पार्टी नेतृत्व के सामने संगठन को मजबूत करने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर लगातार हो रहे इस्तीफों से आंतरिक कलह उजागर हो रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार इस असंतोष को कैसे संभालती हैं और संगठन के भीतर बढ़ते मतभेदों को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाती हैं।