Nashik Double Murder : पुलिस जल्द ही इस मामले में बड़ा खुलासा कर सकती है। कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। उधर, दोहरे हत्याकांड से स्थानीय लोगों में आक्रोश का माहौल है।
Maharashtra crime : महाराष्ट्र के नाशिक शहर में बुधवार रात एक दिल दहला देने वाली घटना हुई, जहां दो सगे भाइयों की धारदार हथियार से निर्मम हत्या कर दी गई। इस डबल मर्डर से पूरे शहर में हड़कंप मच गया है। मृतकों की पहचान उमेश उर्फ मन्ना जाधव और उनके भाई प्रशांत जाधव के रूप में हुई है। उमेश एनसीपी (अजित पवार गुट) के शहर उपाध्यक्ष थे, जिससे इस हत्याकांड ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। हत्या के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए और पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है।
जानकारी के मुताबिक, नासिक के अंबेडकरवाडी (Ambedkarwadi) में हमलावरों ने दोनों भाइयों पर कोयते से कई वार किए. स्थानीय लोगों ने दोनों को खून से लथपथ हालत में सड़क पर गिरा देखा और तुरंत उन्हें जिला अस्पताल ले गए. जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया।
हत्या की खबर फैलते ही सरकारी अस्पताल के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। स्थिति तनावपूर्ण होती देख पुलिस को अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा।
घटना की गंभीरता को देखते हुए नाशिक क्राइम ब्रांच सहित पुलिस की चार टीमें बनाई गई हैं। आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही हैं। फ़िलहाल पुलिस ने पांच संदिग्धों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ कर रही है।
फ़िलहाल हत्या के पीछे की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है, लेकिन पुलिस का मानना है कि यह मामला पुरानी रंजिश से जुड़ा हो सकता है। प्रारंभिक जांच में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि किसी विवाद के कारण दोनों भाईयों की बेरहमी से हत्या की गई होगी।
इस हत्याकांड ने नाशिक में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं से नागरिकों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। अब सभी की नजरें पुलिस जांच पर टिकी हैं कि क्या वे इस दोहरे हत्याकांड के असली गुनहगारों तक पहुंच पाती है या नहीं।
इस बीच, एनसीपी (शरद पवार) विधायक रोहित पवार ने कहा, "कल नासिक में अजित पवार की पार्टी के उपाध्यक्ष समेत एसटी समुदाय के 2 लोगों की हत्या कर दी गई। इस पर हमें टालमटोल जवाब दिए जा रहे हैं। जब नागपुर में घटना हुई, तो पुलिस कमिश्नर ने कुछ और कहा और विधानसभा में बयान कुछ और दिया गया। कल मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रियों को ऐसे बयान देने से पहले संयम बरतना चाहिए। ऐसा कहने के बजाय, बेहतर होगा कि वे इस्तीफा दे दें..."