
Maharashtra Pilgrims return from Nepal: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और महाप्रलय ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में 600 से अधिक लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है, जबकि हजारों लोग लापता बताए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। इस आपदा की चपेट में कुछ भारतीय नागरिक भी आए हैं। इस बीच नेपाल में फंसे महाराष्ट्र के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। महाराष्ट्र के कुल 143 श्रद्धालु अब अपने घर लौट रहे हैं। इनमें नागपुर के 106 श्रद्धालु, जबकि महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों के 37 श्रद्धालु शामिल हैं।
नेपाल के महाप्रलय से बचकर मुंबई लौटे 37 श्रद्धालुओं ने अपने रोंगटे खड़े कर देने वाले अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उनके समूह के दो लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। दोनों को ऑक्सीजन की गंभीर समस्या हो रही थी। मजबूरन उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा।
श्रद्धालुओं ने बताया कि जिस इलाके में वे जाने वाले थे, उसी इलाके में कुछ ही देर बाद महाप्रलय ने तबाही मचा दी। लेकिन उस समय वे अस्पताल में मौजूद थे। अगर वे अस्पताल नहीं गए होते तो शायद बाढ़ के तेज बहाव में बह गए होते।
मुंबई एयरपोर्ट पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने बताया कि महाप्रलय आने से पहले वे और ईशा ग्रुप एक ही होटल में ठहरे हुए थे। सभी लोग साथ थे। उस समय उनका समूह नेपाल सीमा से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर था।
उन्होंने कहा कि हालात इतने भयावह थे कि अगर उस समय वे अस्पताल नहीं गए होते तो उनका बचना मुश्किल था। अस्पताल जाने का फैसला ही उनके लिए जीवन और मौत के बीच अंतर साबित हुआ।
श्रद्धालुओं के मुताबिक, मानसरोवर में एक सदस्य की तबीयत काफी बिगड़ गई थी। इसके बाद सभी ने नीचे उतरने का फैसला किया। वे ईशा ग्रुप के साथ ही गाड़ियों में बैठकर आगे बढ़े। हालांकि, मेडिकल प्रमाणपत्र के बिना उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं मिली।
इसी वजह से उन्हें अस्पताल जाना पड़ा। अस्पताल में करीब डेढ़ घंटे का समय बीता और इसी दौरान वह भयानक महाप्रलय आ गया।
श्रद्धालुओं ने बताया कि अगर वे उस डेढ़ घंटे के दौरान अस्पताल में नहीं होते तो जिस जगह पर वे जाने वाले थे, वहीं बाढ़ की चपेट में आ जाते।
नेपाल से लौटे श्रद्धालुओं ने कहा कि अस्पताल में बिताया गया वह डेढ़ घंटा उनकी जिंदगी का सबसे अहम समय साबित हुआ।
उन्होंने कहा, “हमारे लिए वह डेढ़ घंटा जिंदगी बचाने वाला साबित हुआ। उसी दौरान महाप्रलय आया और हम उस जगह पर मौजूद नहीं थे, जहां तबाही हुई।”
इस पूरे घटनाक्रम को याद करते हुए एक श्रद्धालु ने कहा, “जिसकी रक्षा ईश्वर करते हैं, उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता।” उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा से ही वे इस भयावह आपदा से सुरक्षित निकल पाए।
एक महिला पर्यटक ने कहा, "हालात इतने खतरनाक थे कि हमने घर लौटने की उम्मीद ही छोड़ दी थी… मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की वजह से हम वापस लौट पाए।"
नेपाल में आई इस भीषण प्राकृतिक आपदा ने जहां सैकड़ों परिवारों को उजाड़ दिया, वहीं महाराष्ट्र के इन 143 श्रद्धालुओं की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है। महज एक मेडिकल इमरजेंसी और अस्पताल जाने का फैसला उनके लिए जिंदगी बचाने वाला साबित हुआ।