Mumbai News : रिजर्व बैंक ने दी है सिर्फ 10 हजार निकालने की छूट, त्योहारी सीजन में हजारों ग्राहक परेशान हाईकोर्ट पहुंचा मामला, शीघ्र सुनवाई का अनुरोध मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा की ओर से जांच के लिए बनाई गई है विशेष टीम रिजर्व बैंक भी अपने हिसाब से करा रहा बैंक की ओर से बांटे गए कर्ज की जांच
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मुंबई. पंजाब एंड महाराष्ट्र (पीएमसी) बैंक के खिलाफ भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से की गई कार्रवाई का मामला बांबे हाईकोर्ट पहुंच गया है। कंज्यूमर एक्शन नेटवर्क नामक संस्था की ओर से अदालत में जनहित याचिका दायर की गई है। संस्था का कहना है कि पीएमसी बैंक की ओर से की गई गड़बड़ी की सजा वह खाताधारक भुगत रहे हैं, जिन्होंने अपने खून-पसीने की कमाई बैंक में जमा कर रखी है। व्यापक जनहित का हवाला देते हुए हाईकोर्ट से अनुरोध किया गया है कि मामले पर शीघ्र सुनवाई होनी चाहिए।
कंज्यूमर एक्शन नेटवर्क का कहना है कि गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद पीएमसी बैंक प्रबंधन के खिलाफ रिजर्व बैंक को फौरी कार्रवाई करनी चाहिए थी। इसके बजाय केंद्रीय बैंक ने बिना अग्रिम सूचना दिए ग्राहकों के खातों से लेन-देन पर रोक लगा दिया। पहले छह महीने में एक रुपए निकालने की छूट दी गई थी, जिसे बढ़ा कर रिजर्व बैंक ने 10 हजार रुपए कर दिया है। बावजूद इसके पीएमसी बैंक के हजारों ग्राहक परेशान हैं। बैंक में जमा अपनी पूंजी को लेकर ग्राहकों की चिंता दिन ब दिन बढ़ती जा रही है।
पुलिस ने बनाई एसआईटी
रिजर्व बैंक के कहने और जसबीर सिंह मट्ठा की शिकायत के आधार पर मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) ने एचडीआईएल और पीएमसी बैंक के 14 अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मामले की तफ्तीश के लिए एसआईटी गठित की गई है। म_ा ने पुलिस को बताया कि बैंक के प्रबंध निदेशक जॉय थॉमस और अध्यक्ष वरियाम सिंह व अन्य अधिकारी गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार हैं। उक्त लोगों के साथ मिलीभगत कर एचडीआईएल ने 2008 व 2009 के दौरान पीएमसी बैंक की भांडुप शाखा से कर्ज लिया, जिसकी वसूली नहीं हो पाई। इसके बाद बैंक ने इस कर्ज को एनपाए घोषित कर दिया। रिजर्व बैंक को भी इस मामले की जानकारी नहीं दी गई।
4,335 करोड़ की गड़बड़ी
रिजर्व बैंक की जांच में खुलासा हुआ है कि पीएमसी बैंक ने बड़े पैमाने पर कंपनियों को लोन दिया है। अब तक 4,335 करोड़ रुपए की गड़बड़ी पकड़ी गई है। एचडीआईएल को 44 खातों के जरिए लोन दिया गया, जिनमें से 10 खातों की ही जांच अब तक हो पाई है। गड़बड़ी पकड़ में न आए, इसके लिए 21 हजार से ज्यादा फर्जी खाते खोले गए। कंपनी पर बैंक की बकाया राशि में से 1902.66 करोड़ रुपए राकेश वाधवा, 1306.2 करोड़ एचडीआईएल, 128.65 करोड़ सारंग वाधवा के नाम हैं। बाकी पैसे भी एचडीआईएल की सहायक कंपनियों के खाते में ट्रांसफर किए गए। एचडीआईएल ने अपनी सफाई में बताया है कि हमने अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए प्रशासक से समय मांगा है।
जिम्मेदार कौन?
सवाल उठता है कि करोड़ों रुपए की इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार कौन है? इस सवाल का जवाब बैंक के हजारों खाताधारक चाहते हैं, जिन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई जमा कर रखी है। हालांकि परेशानहाल पीएमसी खाताधारकों को इस सवाल का जवाब नहीं मिला है।