
Shiv Sena UBT Split: महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले दो दिनों से चर्चा का केंद्र बने ‘ऑपरेशन टाइगर’ (Operation Tiger) को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में होने की अटकलों के बीच धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा है कि उन्होंने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है और फिलहाल वह दिल्ली में नहीं बल्कि अपने परिवार के साथ पुणे में हैं।
महाराष्ट्र और दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि ठाकरे गुट के छह सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं और वे अलग समूह बनाकर नई राजनीतिक दिशा तय कर सकते हैं। इन चर्चाओं में ओमराजे निंबालकर का नाम सामने आने के बाद सियासी हलचल और बढ़ गई थी। ओमराजे शिवसेना से एक बार विधायक और दो बार सांसद रहे हैं।
ओमराजे निंबालकर ने कहा कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता राजनीति नहीं, बल्कि उनके परिवार से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला है। उन्होंने कहा कि पवनराजे निंबालकर हत्याकांड के फैसले का उन्हें इंतजार है, जिसकी सुनवाई का अहम निर्णय 20 जून को आने वाला है।
उन्होंने कहा, "मैंने अभी तक कोई राजनीतिक निर्णय नहीं लिया है। मेरे और मेरे परिवार के लिए इस समय पवनराजे निंबालकर हत्या प्रकरण सबसे महत्वपूर्ण है। 20 जून को इस मामले का फैसला आने के बाद ही मैं मीडिया के सामने अपनी आधिकारिक भूमिका स्पष्ट करूंगा। तब तक मैं किसी भी राजनीतिक विषय पर टिप्पणी नहीं करूंगा।"
साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस समय दिल्ली में मौजूद नहीं हैं और अपने परिवार के साथ पुणे में हैं।
ऑपरेशन टाइगर की चर्चाओं के बीच उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने अपने सभी लोकसभा सांसदों को व्हिप जारी किया है। पार्टी ने गुरुवार सुबह 11 बजे नई दिल्ली में संसदीय दल की बैठक बुलाई है। इस बैठक को ठाकरे गुट के सांसदों की निष्ठा की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। इस बैठक में सांसदों की मौजूदगी से यह स्पष्ट हो सकता है कि पार्टी के भीतर बगावत की चर्चाओं में कितनी सच्चाई है।
बुधवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उद्धव गुट के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि उनके सांसद ओमराजे निंबालकर पर बगावत के लिए दबाव बनाया गया है। राउत के मुताबिक, ओमराजे के पिता की हत्या से जुड़े मामले का फैसला आने वाला है और उन्हें यह कहा गया कि यदि फैसला उनके पक्ष में चाहिए तो उन्हें सत्ता पक्ष का साथ देना होगा।
शिंदे गुट की ओर से दावा किया जा रहा है कि ठाकरे गुट के छह सांसद उनके संपर्क में हैं। हालांकि, ठाकरे गुट ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपे गए कथित पत्र पर छह में से दो सांसदों के हस्ताक्षर ही नहीं हैं। बताया जा रहा है कि कुछ सांसदों को दिए गए आश्वासन पूरे नहीं हुए, जिसके चलते उन्होंने समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए।
एक तरफ शिंदे गुट लगातार बड़ी राजनीतिक सफलता का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ठाकरे गुट अपने सभी सांसदों के साथ होने की बात कह रहा है। ओमराजे निंबालकर के बयान के बाद पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ आ गया है। अब से कुछ देर बाद होने वाली उद्धव गुट के बैठक से ‘ऑपरेशन टाइगर‘ की असली तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।