
महाराष्ट्र के पुणे में ठगी की एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक शातिर बदमाश ने प्रतिष्ठित हॉस्पिटल में काम करने वाले एक डॉक्टर की पहचान चुराकर एक फाइनेंस कंपनी से कर्ज उठा लिया और उसका एक भी ईएमआई नहीं भरा। पीड़ित डॉक्टर को अपने साथ हुई इस धोखाधड़ी का पता उस समय पता चला, जब उसने कार लोन के लिए आवेदन किया था। पीड़ित डॉक्टर की पहचान हर्षल एकतपुरे के तौर पर हुई है।
इस मामले में पुणे पुलिस ने बताया है कि हर्षल एकतपुरे को कार लोन देने वाले बैंक ने बताया कि उसे लोन नहीं मिल सकता क्योंकि वह लोन लेने के योग्य नहीं हैं। उनके नाम पर एक फाइनेंस कंपनी का करीब 90 हजार रुपये का एजुकेशन लोन बाकी है। इसके बाद डॉक्टर को एहसास हुआ कि लोन लेने के लिए किसी ने उसके डाक्यूमेंट्स का गलत इस्तेमाल किया है। यह भी पढ़े: Mumbai News: बिज़नेस शुरू करने के लिए स्टूडेंट ने दिया अंडों का आर्डर, हुआ ठगी का शिकार; जानें पूरा मामला
इसके बाद डॉक्टर ने फौरन यरवदा थाने में इस घटना की शिकायत दर्ज कराई। हर्षल एकतपुरे ने अपनी पुलिस शिकायत में बताया है कि बैंक ने 21 सितंबर को जमा किए गए उनके आवेदन को इस आधार पर रिजेक्ट दिया कि उन्हें पहले लिए गए लोन को भरना पड़ेगा। आगे पूछताछ करने पर पीड़ित डॉक्टर को पता चला कि एक प्राइवेट फाइनेंस कंपनी ने डाक्यूमेंट्स और अन्य डिटेल्स को ठीक से जांचे बिना ही एक शख्स को उनके नाम पर कर्ज दे दिया था। इसके बाद पीड़ित डॉक्टर ने कई बार उस फाइनेंस कंपनी से संपर्क किया लेकिन उसे संबंधित डिटेल्स नहीं दिया गया। इसके बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम ब्रांच पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
बता दें कि डॉक्टर हर्षल एकातपुरे ने बताया कि लोन उनके क्रेडिट इंफॉर्मेशन ब्यूरो (इंडिया) लिमिटेड (CIBIL) के स्कोर कम दिखा रहा था। डॉक्टर ने कहा कि उन्होंने अपनी बेटी की कोचिंग क्लास के लिए ऑनलाइन फीस जमा किया था। इसके लिए उन्होंने अपना पैन और आधार कार्ड की डिटेल दी थीं। डॉक्टर को शक है कि आरोपी ने वहां से उनके डॉक्यूमेंट उठा लिए होंगे। इस मामले पर वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बालकृष्ण कदम ने बताया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। इस मामले की आगे जांच जारी है।