Rahul Gandhi Vs Devendra Fadnavis : कांग्रेस ने संविधान की लाल रंग की प्रति लिए हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की तस्वीरें साझा कर पलटवार किया है।
Maharashtra Assembly Elections : महाराष्ट्र में 20 नवंबर को एक ही चरण में विधानसभा चुनाव होने हैं. इसको लेकर राज्य में सियासी सरगर्मी जोरों पर है। मतदान की तारीख नजदीक आने के साथ ही नेताओं की बयानबाजी भी और धारदार हो गई है। इस बीच, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपने हाथ में ‘लाल किताब’ लेकर शहरी नक्सलियों का समर्थन पाने की कोशिश कर रहे हैं। इस पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए फडणवीस को सोच-समझकर बोलने की नसीहत दी।
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अपनी रैलियों के दौरान लाल रंग के कवर वाले संविधान के संक्षिप्त संस्करण प्रदर्शित करते रहे हैं। बुधवार को नागपुर की अपनी यात्रा के दौरान भी राहुल ने एक कार्यक्रम में लाल रंग के कवर वाली संविधान की एक प्रति अपने हाथ में लेकर प्रदर्शित की। इस दौरान उन्होंने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने फडणवीस पर पलटवार करते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘फडणवीस हताश हो रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर तथाकथित ‘‘शहरी नक्सलियों’’ से समर्थन लेने के लिए ‘‘लाल किताब’’ दिखाने का आरोप लगाया. फडणवीस जिस पुस्तक को लेकर आपत्ति जता रहे हैं वह भारत का संविधान है, जिसके मुख्य शिल्पकार डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर थे।’’
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के हाथ में संविधान की लाल रंग की प्रति वाली तस्वीरें भी साझा कीं।
इस दौरान जयराम रमेश ने दावा किया कि यह भारत का वही संविधान है जिसे ‘मनुस्मृति’ से प्रेरित न बताकर आरएसएस ने नवंबर 1949 में हमला किया था तथा यह भारत का वही संविधान है जिसे प्रधानमंत्री मोदी बदलना चाहते हैं. उन्होंने कहा, ‘‘जहां तक लाल किताब का सवाल है तो फडणवीस को पता होना चाहिए कि इसमें भारत में कानून के क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों में से एक केके वेणुगोपाल की प्रस्तावना है, जो 2017-2022 के दौरान भारत के अटॉर्नी जनरल थे. इससे पहले, प्रधानमंत्री और स्वयंभू चाणक्य को भी यह लाल किताब दी गयी है।’’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने ‘एक्स’ पर आगे लिखा, ‘‘जहां तक ‘शहरी नक्सली’ का सवाल है तो केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 9 फरवरी 2022 और 11 मार्च 2020 को संसद को बताया है कि भारत सरकार इस शब्द का इस्तेमाल नहीं करती है। फडणवीस को पहले सोचना चाहिए और फिर बोलना चाहिए।’’