
Raj Thackeray Balasaheb Thackeray story: महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे परिवार और शिवसेना से जुड़े पुराने किस्से अक्सर चर्चा में रहते हैं। इस बार मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुनाया है। संजय राउत की किताब 'बोध कीर्तन' के विमोचन समारोह में राज ठाकरे ने बताया कि शुरुआती दिनों में बालासाहेब ठाकरे संजय राउत से काफी नाराज रहते थे। यहां तक कि एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने राउत को कई बार गालियां भी दी थीं। राज ठाकरे के इस खुलासे पर समारोह में मौजूद लोग ठहाके लगाने लगे। अब राज्य सभा (RS) सांसद संजय राउत ने भी इस पूरे किस्से पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
राज ठाकरे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने कहा कि उन्होंने बाल ठाकरे के साथ करीब 40 साल बिताए हैं। बालासाहेब उनके लिए गुरु और शिक्षक की तरह थे। दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान राउत ने कहा, "मैंने उनके साथ 40 साल बिताए हैं। अपने जन्म से ही उन्हें देखता आया हूं। मेरे घर में आज भी बाला साहेब की तस्वीर है। वह मेरे गुरु थे। वह मुझ पर नाराज होते थे, यह भी उनका आशीर्वाद था। बालासाहेब ठाकरे और श्रीकांत ठाकरे ने मुझे गढ़ा है।"
बता दें कि संजय राउत दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया ब्लॉक के आंदोलन में शामिल होने राजधानी पहुंचे हैं।
मुंबई में संजय राउत की किताब 'बोध कीर्तन' के विमोचन समारोह में शनिवार को राज ठाकरे ने बताया कि शुरुआती दिनों में संजय राउत 'लोकप्रभा' साप्ताहिक में काम करते थे। उस समय वह शिवसेना की आलोचना करते हुए लेख लिखते थे। यही वजह थी कि बाल ठाकरे उनसे नाराज रहते थे।
राज ठाकरे ने बताया कि उस दौर में उनकी और संजय राउत की अच्छी दोस्ती थी। वह खुद 'लोकसत्ता' के लिए फ्रीलांस कार्टून बनाया करते थे। दोनों के बीच अक्सर बातचीत होती थी।
राज ठाकरे के मुताबिक, 1988-89 के आसपास जब 'सामना' अखबार शुरू हुआ, तब संजय राउत उसकी भाषा और लेखन शैली को लेकर भी सवाल उठाते थे। वह कहते थे कि अखबार पर संपादक के तौर पर बालासाहेब ठाकरे का नाम लिखा है, लेकिन उसकी भाषा ऐसी क्यों है? क्या बालासाहेब के अखबार की भाषा ऐसी होनी चाहिए?
राज ठाकरे ने 1992 का एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि उस समय संजय राउत ने उनसे पूछा था कि क्या बालासाहेब ठाकरे 'लोकप्रभा' के लिए इंटरव्यू देंगे? इस पर राज ठाकरे ने कहा कि उन्हें इस बारे में पता नहीं है, लेकिन वह इस पर बाला साहेब से बात करेंगे।
राज ठाकरे ने बताया, "मैंने बाला साहेब से पूछा तो उन्होंने मुझे चार अलग-अलग अंदाज में गालियां दीं। उन्होंने कहा कि मुझे उसका (संजय राउत का) चेहरा भी नहीं देखना है। मैंने उनसे कहा कि काका (चाचा), एक बार मिल तो लीजिए। इंटरव्यू अच्छा होगा।"
काफी कोशिशों के बाद बालासाहेब इंटरव्यू देने के लिए तैयार हो गए। इसके बाद शिवसेना भवन में बालासाहेब ठाकरे, संजय राउत और राज ठाकरे की मौजूदगी में इंटरव्यू शुरू हुआ।
राज ठाकरे ने बताया कि शुरुआत में सब ठीक चल रहा था, लेकिन सवाल-जवाब के दौरान संजय राउत ने कुछ ऐसे तीखे और असहज सवाल पूछने शुरू कर दिए कि बालासाहेब उन्हें इंटरव्यू के बीच में ही गालियां देने लगे। राज ठाकरे ने बताया कि यह पूरा इंटरव्यू रिकॉर्ड हुआ था।
राज ठाकरे के मुताबिक, इंटरव्यू वैसे ही प्रकाशित भी हुआ, बाल साहेब की ओर से संजय राउत को दी गई गालियां भी जस की तस छापी गई थीं। यह बात बाला साहेब को पसंद आई। उन्हें लगा कि जो व्यक्ति अपने ऊपर किए गए मजाक और आलोचना को भी सार्वजनिक कर सकता है, वह ईमानदार और हिम्मत वाला है।
इसके बाद एक दिन बाला साहेब ने संजय राउत को मिलने के लिए बुलाया। इसके बाद संजय राउत और ठाकरे परिवार के बीच नजदीकियां बढ़ीं और 1992 में संजय राउत शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' के संपादक बने।