
प्रतीकात्मक तस्वीर
Kurla Lift Death: लिफ्ट के रखरखाव में लापरवाही ने 11 साल के बच्चे की जान ले ली। मुंबई के कुर्ला पूर्व स्थित एक रिहायशी इमारत में लिफ्ट हादसे में बच्चे की मौत के करीब तीन महीने बाद पुलिस ने सोसायटी के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जांच में सामने आया कि सोसायटी ने लिफ्ट की देखभाल और मरम्मत के लिए किसी अधिकृत ठेकेदार को नियुक्त नहीं किया था।
बिजली निरीक्षक की रिपोर्ट में भी लिफ्ट को इस्तेमाल के लिए असुरक्षित बताया गया है। मामला कुर्ला पूर्व के जागृति नगर स्थित शमीम टावर की बिल्डिंग नंबर-2 की बी विंग का है। यहां 6 जुलाई को 11 वर्षीय मासूम की लिफ्ट हादसे में मौत हो गई थी। पुलिस ने इस मामले में सोसायटी के अध्यक्ष तौफिक अस्फाक खान (52), सचिव आसिफ मंसूर खान (50) और कोषाध्यक्ष युसेन पटेल (60) के खिलाफ मामला दर्ज किया है। तीनों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1), 125, 289 और 3(5) के तहत कार्रवाई की गई है।
एफआईआर के अनुसार 6 जुलाई की रात करीब 9:30 बजे मासूम दसवीं मंजिल के गलियारे में दूसरे बच्चों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान अचानक लिफ्ट का दरवाजा खुल गया। संतुलन बिगड़ने से मासूम लिफ्ट के शाफ्ट में गिर गया। वह तीसरी मंजिल पर खड़ी लिफ्ट की छत से टकराया। हादसे में उसे गंभीर चोटें आईं। घटना के समय बच्चे के पिता जमीर शौकत तहसीदार काम के सिलसिले में चेंबूर गए हुए थे। मां फजिला ने फोन कर उन्हें हादसे की जानकारी दी। परिवार के सदस्यों और इमारत में रहने वाले लोगों ने सोसायटी में पानी की आपूर्ति का काम करने वाले इरफान खान की मदद से बच्चे को बाहर निकाला। उसे तुरंत सायन अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रात करीब 10:40 बजे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
हादसे के बाद नेहरू नगर पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। इस दौरान कुर्ला पश्चिम के बिजली निरीक्षक की ओर से सौंपी गई जांच रिपोर्ट में लिफ्ट के रखरखाव में गंभीर खामियां सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र लिफ्ट कानून के तहत लिफ्ट की देखभाल और मरम्मत किसी अधिकृत लाइसेंसधारी ठेकेदार से कराना जरूरी था लेकिन सोसायटी ने ऐसा कोई ठेकेदार नियुक्त नहीं किया था। रिपोर्ट में रखरखाव की कमी को हादसे की वजह बताया गया और लिफ्ट को तकनीकी रूप से इस्तेमाल के लायक नहीं माना गया।
इमारत के निवासियों ने पुलिस को बताया कि बी विंग की लिफ्ट नंबर-2 दसवीं मंजिल पर नहीं रुकती थी। इस कारण दसवीं मंजिल पर रहने वाले लोगों को लिफ्ट पकड़ने के लिए नौवीं या ग्यारहवीं मंजिल पर जाना पड़ता था। निवासियों के अनुसार उन्होंने लिफ्ट की खराबी को लेकर कई बार सोसायटी के अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष और अन्य सदस्यों से शिकायत की थी। इसके बावजूद समस्या दूर करने के लिए कोई उचित कदम नहीं उठाया गया। सोसायटी हर महीने निवासियों से रखरखाव शुल्क भी वसूलती थी, जिसमें लिफ्ट जैसी साझा सुविधाओं की देखभाल का खर्च शामिल था।
मामले की जांच कर रहे पुलिस उपनिरीक्षक विठ्ठल वैभसे ने 29 अक्टूबर 2026 को बच्चे के माता-पिता को नेहरू नगर पुलिस थाने बुलाया। पुलिस ने उन्हें जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेज और सबूत दिखाए। इसके बाद पिता जमीर तहसीदार की शिकायत पर सोसायटी के तीन पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। करीब तीन महीने बाद हुई इस कार्रवाई के बाद अब पुलिस मामले में आगे की जांच कर रही है।
Updated on:
1 Nov 2026, 4:45 PM IST
Published on:
1 Nov 2026, 4:45 PM IST
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