राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रम में बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की मौजूदगी ने सभी को चौंका दिया है। इस पर उद्धव गुट के नेता ने कहा, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संघ में मुसलमानों का भी स्वागत है, या यह सिर्फ दिखावा था।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की मौजूदगी ने सबका ध्यान खींचा है। इसी मुद्दे पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता और सांसद संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
राज्यसभा सांसद संजय राउत ने संघ की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सलमान खान को आमंत्रित किए जाने को लेकर सीधे मोहन भागवत से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या केवल एक बड़े और लोकप्रिय अभिनेता होने की वजह से सलमान खान को कार्यक्रम में बुलाया गया, या फिर यह संकेत है कि संघ अब अन्य मुसलमानों के लिए भी अपने दरवाजे खोल रहा है।
राउत ने यह भी कहा कि उन्हें भी संघ के कार्यक्रम का निमंत्रण मिला था, लेकिन अन्य कार्यक्रम की वजह से वे शामिल नहीं हो सके। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि सलमान खान को कार्यक्रम में बुलाना क्या सिर्फ भीड़ जुटाने के लिए था, या यह दिखाने के लिए कि एक बड़ा बॉलीवुड स्टार भी संघ के मंच पर आया है।
उन्होंने कहा कि यदि संघ वास्तव में समावेशी हो रहा है, तो मोहन भागवत को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या अब संघ में मुसलमानों का स्वागत किया जाएगा।
उद्धव ठाकरे के करीबी सहयोगी संजय राउत ने भाजपा और संघ पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले कुछ समय से देश में हिंदू-मुसलमान के बीच जो नफरत और बदले की राजनीति फैलाई जा रही है, उसमें संघ के लोगों की भी भूमिका है। उन्होंने कहा, "मोदी, अमित शाह, फडणवीस और वे सभी लोग जो हिंदू और मुसलमानों के बीच नफरत फैलाने वाली राजनीति कर रहे हैं, वे सभी मूल रूप से संघ से हैं।"
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज सत्ता है, इसलिए ये कलाकार और बड़े नाम ऐसे कार्यक्रमों में दिखाई दे रहे हैं। क्या सत्ता जाने के बाद भी ये कलाकार इसी तरह संघ के मंच पर नजर आएंगे? उन्होंने दावा किया कि ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होने वाले लोग अक्सर आपस में कहते हैं, "क्या करेंगे भाई, जाना पड़ता है।"
संजय राउत ने कहा कि सलमान खान को बुलाना एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन देश में बड़ी संख्या में राष्ट्रभक्त और राष्ट्रवादी मुसलमान मौजूद हैं, जिनका भी खुले तौर पर स्वागत होना चाहिए।