मुंबई

महाराष्ट्र में बिखर रही अखिलेश की सपा! रईस शेख को थमाया नोटिस, 14 दिनों का अल्टीमेटम

Abu Azmi vs Rais Shaikh: नगर निगम चुनाव के दौरान विधायक रईस शेख सपा उम्मीदवारों के प्रचार से दूरी बनाए हुए थे और कांग्रेस व एनसीपी के उम्मीदवारों का समर्थन करते दिखे। यहां तक कि वे उनके प्रचार पोस्टरों पर भी नजर आए। हालांकि उन्होंने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है।

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Apr 10, 2026
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (Photo: IANS)

महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। सपा ने भिवंडी (पूर्व) के अपने ही विधायक रईस शेख को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और अनुशासनहीनता के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस घटनाक्रम से राज्य में अखिलेश यादव की पार्टी के भीतर बड़ी फूट के संकेत मिल रहे हैं।

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पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप

भिवंडी शहर अध्यक्ष अनस अंसारी द्वारा जारी इस नोटिस में आरोप लगाया गया है कि रईस शेख ने कई मौकों पर पार्टी के संविधान, अनुशासन और आधिकारिक निर्देशों का उल्लंघन किया है। नोटिस में यह भी दावा किया गया है कि कद्दावर नेता ने सार्वजनिक मंचों पर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बयानबाजी की, जिससे पार्टी की छवि और एकता को नुकसान पहुंचा है।

सपा के स्थानीय नेतृत्व का दावा है कि उनके पास कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की ओर से रईस शेख के खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं। इन शिकायतों में कहा गया है कि विधायक के आचरण से जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हुई है, जिससे भिवंडी में पार्टी के राजनीतिक हितों पर बुरा असर पड़ा है।

कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया

हाल ही में हुए भिवंडी नगर निगम चुनाव का जिक्र करते हुए पार्टी ने आरोप लगाया कि विधायक ने दूसरे दलों के उम्मीदवारों के लिए वोट मांगा था। नोटिस में कहा गया है, समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों का साथ देने के बजाय रईस शेख कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के उम्मीदवारों के समर्थन में खड़े थे और यहां तक कि उनके चुनावी पोस्टरों पर भी उनकी तस्वीर नजर आई थी। इसे अनुशासन का गंभीर उल्लंघन माना गया है।

14 दिन में जवाब देने का अल्टीमेटम

नोटिस में साफ चेतावनी दी गई है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो विधायक के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें निलंबन या निष्कासन भी शामिल है।

रईस शेख को लिखित जवाब देने के लिए 14 दिनों का समय दिया गया है। तय समय में जवाब नहीं देने पर पार्टी आगे की कार्रवाई करेगी।

शेख ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

वहीं, रईस शेख ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उन्हें ऐसा कोई नोटिस आधिकारिक रूप से प्राप्त नहीं हुआ है और उन्होंने यह सिर्फ सोशल मीडिया पर देखा है। उन्होंने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया।

अबू आजमी बनाम रईस शेख

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह विवाद सपा के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष अबू आजमी और रईस शेख के बीच चल रहे मतभेदों से भी जुड़ा हुआ है। जनवरी में हुए नगर निगम चुनाव के दौरान यह विवाद तब शुरू हुआ जब रईस शेख ने सीधे सपा मुखिया अखिलेश यादव को पत्र लिखकर अबू आजमी के नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया था कि राज्य में पार्टी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चलाई जा रही है और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने अखिलेश यादव से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए तो राज्य में पार्टी का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

शेख के आरोपों के जवाब में सपा के स्थानीय नेतृत्व ने भी अखिलेश यादव को पत्र लिखा और शेख पर गंभीर आरोप लगाए। पत्र में कहा गया है कि 2019 में जब रईस शेख पहली बार सपा के विधायक बने। इसके बाद उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के संगठन की जिम्मेदारी की मांग प्रदेश अध्यक्ष से की, लेकिन इसे अमान्य कर दिया गया। लेकिन वरिष्ठ नेताओं के कहने पर उनके विधानसभा क्षेत्र भिवंडी पूर्व के संगठन की पूरी जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई। उन्होंने पुराने और वफादार कार्यकर्ताओं को किनारे कर दिया। इस पत्र में रईस शेख पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और मुंबई महानगरपालिका चुनाव (BMC Election) में विपक्षी दलों के साथ साठगांठ करने के भी आरोप लगाए गए थे।

महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी (सपा) के वर्तमान में सिर्फ दो विधायक- अबू आजमी और रईस शेख हैं। अब देखना यह होगा कि क्या अखिलेश यादव इस मामले में दखल देकर महाराष्ट्र में बिखरती सपा को बचा पाएंगे या रईस शेख कोई नया राजनीतिक रास्ता चुनेंगे।

Updated on:
10 Apr 2026 04:17 pm
Published on:
10 Apr 2026 04:01 pm
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