बताया जा रहा है कि शिवनेरी किले पर पर्याप्त पुलिस बंदोबस्त और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था नहीं होने से हालात बेकाबू हो गए और देखते ही देखते भगदड़ मच गई।
महाराष्ट्र के पुणे में छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के उत्साह के बीच एक दुखद घटना घटी है। शिवाजी महाराज की जन्मस्थली शिवनेरी किले पर उत्सव के दौरान भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस घटना में महिलाओं और छोटे बच्चों समेत कई लोगों के घायल होने की खबर है, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। राहत की बात यह रही कि किसी की जान नहीं गई, लेकिन इस हादसे ने प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि एसपी ग्रामीण संदीप सिंह गिल ने कहा, "भगदड़ जैसी कोई घटना नहीं हुई... शिवनेरी किले पर लोग दर्शन के लिए आ रहे हैं और दर्शन रात भर जारी रहा...लोग जल्दबाजी में नीचे उतर रहे थे, उन्हें ऐसा करने से रोका भी गया लेकिन इस दौरान एक लड़के का पैर फिसल गया। उसके कारण 7-8 लोग सीढ़ियों पर गिर गए और उनमें से तीन लोगों को चोट लगी है। शिवनेरी किले पर कोई भगदड़ नहीं हुई है..."
शिवाजी महाराज की जयंती के मौके पर हर साल की तरह इस बार भी राज्यभर से बड़ी संख्या में लोग जुन्नर स्थित शिवनेरी किले पर पहुंच रहे हैं। आधी रात से ही किले पर युवाओं, विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं और दर्शनार्थियों का हुजूम उमड़ने लगा था। किले की ओर जाने वाले रास्तों पर भारी भीड़ जमा हो गई थी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अंबरखाना के पास स्थिति अचानक बिगड़ गई। 'हत्ती दरवाजा' और 'गणेश दरवाजा' के संकरे रास्तों पर एक साथ हजारों लोग जमा हो गए। निकलने का रास्ता छोटा होने और पीछे से दबाव बढ़ने के कारण स्थिति अनियंत्रित हो गई और देखते ही देखते वहां अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान रेलिंग भी टूट गई
घटना में कई लोग घायल हुए हैं। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, ज्यादातर लोगों को मामूली चोटें आई हैं। सभी घायलों को जुन्नर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही है।
मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, अगर समय रहते भीड़ को नियंत्रित किया जाता तो यह स्थिति टाली जा सकती थी। शिवाजी जयंती राज्य का बड़ा पर्व है और हर साल शिवनेरी पर भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन की ओर से पर्याप्त सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था क्यों नहीं की गई, इस पर सवाल उठ रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रवेश और निकास मार्गों पर भीड़ प्रबंधन, बैरिकेडिंग और अतिरिक्त पुलिस बल पहले से तैनात होना चाहिए था।