
Omprakash Rajenimbalkar:महाराष्ट्र की सियासत में उठापटक कहें या शिवसेना (यूबीटी) में चल रही बगावत, इन दिनों तोड़-फोड़ और गठजोड़ की राजनीति चरम पर है। इसी बीच धाराशिव से सांसद ओमप्रकाश राजेनिंबालकर मंगलवार को मुंबई की विशेष सीबीआई (CBI) अदालत में मौजूद रहे। वे यहां अपने पिता और कांग्रेस नेता पवन राजेनिंबालकर की वर्ष 2006 में हुई सनसनीखेज हत्या के मामले में अदालत का अंतिम फैसला सुनने पहुंचे थे। हालांकि, विशेष न्यायाधीश द्वारा फैसला पूरी तरह तैयार नहीं किए जाने के कारण मामले की अगली सुनवाई अब 20 जून के लिए निर्धारित की गई है।
राजेनिंबालकर उन छह 'बागी' सांसदों की सूची में शामिल हैं, जिन्होंने गुरुवार को दिल्ली में संजय राउत द्वारा बुलाई गई पार्टी की अहम बैठक छोड़ दी थी। हालांकि, जब उनसे शिंदे गुट में जाने के लिए पैसों के ऑफर (प्रलोभन) के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि लोग ऐसी अफवाहों पर भरोसा न करें।
सूत्रों के मुताबिक, शिंदे सेना में विलय की घोषणा करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपे जाने वाले बागी सांसदों के पत्र पर ओमप्रकाश राजेनिंबालकर ने अभी तक हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उन्होंने मीडिया से साफ कहा है कि वह अपनी राजनीतिक स्थिति और स्टैंड केवल 20 जून को अपने पिता के मर्डर केस का फैसला आने के बाद ही स्पष्ट करेंगे। उन्होंने कहा है कि 'यह फैसला मेरे और मेरे परिवार के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है।'
पारिवारिक और राजनीतिक दुश्मनी
पद्मसिंह पाटिल और पवन राजेनिंबालकर आपस में चचेरे भाई थे। सीबीआई का आरोप है कि पाटिल ने राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण पवन की हत्या की सुपारी दी थी। साल 2004 के लोकसभा चुनाव में पद्मसिंह पाटिल ने पवन राजेनिंबालकर को महज 484 वोटों के मामूली अंतर से हराया था। जीत के बावजूद पाटिल पवन को अपने राजनीतिक करियर के लिए बड़ा खतरा मानते थे। इसके अलावा, तेरणा चीनी सहकारी मिल में पाटिल के खिलाफ पवन द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों ने इस दुश्मनी को और बढ़ा दिया था। वर्तमान में 80 वर्ष से अधिक उम्र के हो चुके पद्मसिंह पाटिल मंगलवार को एम्बुलेंस से व्हीलचेयर पर बैठकर कोर्ट पहुंचे थे।