मुंबई

मुश्किलों से पार पाने जैसा है, यहां की तंग गलियों से होकर गुजरना

स्कूल व स्वास्थ्य केंद्र विहीन है यह वार्ड: भाजपा के शिवकुमार झा 15 वर्ष से कर रहे प्रतिनिधित्व

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Nov 24, 2018
मुश्किलों से पार पाने जैसा है, यहां की तंग गलियों से होकर गुजरना


मुंबई. कांदिवली वार्ड संख्या 23 के लोग वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के लिए मोहताज है। इस वार्ड क्षेत्र में न तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है और न, ही स्कूल। इस वार्ड के लिए पर्याप्त बस सेवा भी नहीं है। मात्र एक बस की सेवा हाल ही में उपलब्ध की
गई है। कांदिवली वार्ड संख्या 23 में अधिकतर निम्न आय वर्ग, कूली-मजदूर रहते हैं। यहां बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, गुजरात, राजस्थान समेत अन्य हिंदी भाषी प्रदेशों और तमिलनाडु, कर्नाटक आदि दक्षिण भारत के लोग निवास करते हैं। थोड़ी-बहुत आबादी महाराष्ट्र के लोगों की भी है। यह हिंदीभाषी आबादी की अधिकता वाला क्षेत्र है। इस वार्ड को लोग समस्याओं का गढ़ वाले क्षेत्र के रूप मेंं पहचानते हैं। लोगों की शिकायत है कि करीब 15 साल से रूलिंग पार्टी का पार्षद होते हुए यहां ना तो सही सडक़ है और न, ही व्यवस्थित नालियां, शौचालय, पानी आदि है। इस वार्ड में सिर्फ 22 सोसाइटियां है, जिसमें 16 से 17 हजार झोपडिय़़ां हैं। यह वार्ड बाजार से घिरा है।
नालियों का काम 65 फीसदी पूरा
वार्ड में कई तरह के विकास कार्य किए जा रहे हैं। नालियों का निर्माण कार्य 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है। बाकी 35 फीसदी भी जनवरी-फरवरी, 2019 तक पूरा हो जाएगा। वार्ड में छह डबल सार्वजनिक शौचालय हैं। इनमें से चार को मरम्मत के लिए चुना गया है। शेष दो अच्छी हालत में हैं। विधायक अतुल भातखलकर के विधायक निधि से 27 सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें 13 का कार्य पूरा हो चुका है। दो का कार्य चल रहा है। वार्ड में पानी की समस्या का समाधान किया गया है।
भीड़-भड़क्का वाला क्षेत्र
इस क्षेत्र में सब्जी मंडी, मछली मार्केट, अनाज मंडी आदि होने से हमेशा भीड़-भड़क्का रहता है। करीब 80 एकड़ में झोपडिय़ां बनी हैं। वार्ड में हर तरफ गंदगी फैली है। सडक़ों पर गंदा पानी, कचरा बिखरा रहता है। झोपडिय़ां हैं, कि यहां लोगों का गुजरना मुश्किल है। तंग गलियों की वजह से एक बार में एक ही व्यक्ति यहां से निकल सकता है। इन परिस्थितियों में भी पुरुषों के स्नाह करने की जगह यह गलियां ही हैं।
फ्लैट में नहीं जाना चाहते लोग
हनुमान नगर में एसआरए योजना के तहत 23 मंजिला 269 प्लैट वाले भवन का निर्माण किया गया है, परन्तु लोग यहां जाना नहीं चाहते। इनका कहना है कि फ्लैट छोटे हैं। लोगों का आरोप है कि नगरसेवक बिल्डर से मिलकर उन्हें यहां से स्थानांतरित कर माहुल भेजने की कोशिश में हैं। माहुल प्रदूषित क्षेत्र है, जिसे लोग रहने योग्य नहीं मानते हैं। आरोप है कि यहां बिल्डरों की नजर इन झोपड़पट्टियों पर है।
इस वार्ड में अंबेडकर नगर, एडीसी चाळ, रोहटे चाळ, विश्वकर्मा चाळ, चौहन चाळ, विमलादेवी चाळ, रामनगर, बाबुभाई चाळ, जनभाग्योदय चाळ, जनार्दन पांडे चाळ, गंगूबाई चाळ, इंदिरा चौक समेत कई चाळ आते हैं, जो सुविधाओं से वंचित हैं।

...पुनर्वसन से होगा विकास
यहां के निवासियों को पक्का मकान देने की कोशिश की जा रही है, पर लोगों की सहमति के बिना यह संभव नहीं है। इसकी वजह से इस क्षेत्र का विकास कार्य प्रभावित हुआ है।
-शिवकुमार झा, नगरसेवक, वार्ड 23 (कांदिवली)

Published on:
24 Nov 2018 04:25 pm
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