
देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे (Photo: IANS)
महाराष्ट्र सरकार ने उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल की 14 झील परियोजनाओं को रद्द कर दिया है। भाजपा नेता व मंत्री पंकजा मुंडे के नेतृत्व वाले पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग ने पिछली सरकारों द्वारा मंजूर की गई 14 झील संरक्षण परियोजनाओं की प्रशासनिक मंजूरी रद्द कर दी है। इन 14 परियोजनाओं में से 11 परियोजनाएं उस समय स्वीकृत की गई थीं जब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री थे और यह विभाग उनके पास था। विभाग ने न केवल इन परियोजनाओं को रद्द किया है, बल्कि जारी किए गए फंड को ब्याज सहित वापस वसूलने का भी आदेश दिया है।
जानकारी के मुताबिक, रद्द की गई 14 परियोजनाओं में से 11 को शिंदे के मुख्यमंत्री रहते मंजूरी दी गई थी, जबकि 3 परियोजनाएं महाविकास अघाड़ी सरकार (MVA) के दौरान आदित्य ठाकरे के मंत्री रहते स्वीकृत हुई थीं।
शिंदे के कार्यकाल में स्वीकृत 11 परियोजनाओं की कुल लागत करीब 244.15 करोड़ रुपये थी, जिनमें से 73.31 करोड़ रुपये पहले ही जारी किए जा चुके थे। इन परियोजनाओं में लातूर की मुक्तेश्वर, समतानगर और औसा झील, रायगढ़ के कर्जत की वडाप झील, बीड के परली की परमपोक झील, अलीबाग की बेलोशी झील और जलगांव के चालिसगांव क्षेत्र की कलमाडू, विसापुर, देवली, ब्राह्मणशेवगे झीलें शामिल हैं।
आदित्य ठाकरे के कार्यकाल में मंजूर 3 परियोजनाएं जो अब रद्द की गई हैं, उनमें रत्नागिरी के लांजा की ओझर झील, मुंबई की एरंगल झील और नासिक के इगतपुरी की खंबाले झील शामिल है, जिसकी कुल लागत 35.99 करोड़ रुपये थी। इनमें से 18 करोड़ रुपये पहले ही वितरित किए जा चुके थे।
विभाग के आदेश में कहा गया है कि इन सभी परियोजनाओं की प्रारंभिक मंजूरी रद्द की जा रही है और संभावित वित्तीय अनियमितताओं से बचने के लिए पहले जारी की गई राशि को ब्याज सहित वापस लिया जाएगा।
यह फैसला इसी साल फरवरी में हुई स्टीयरिंग कमेटी की बैठक के बाद लिया गया। जांच में पाया गया कि 5 परियोजनाएं राज्य की झील संरक्षण योजना के निर्धारित फॉर्मेट के अनुसार तैयार ही नहीं की गई थीं। वहीं 9 परियोजनाओं ने आवेदन के दो साल बाद भी संशोधित प्रोजेक्ट रिपोर्ट जमा नहीं की गई।
महाराष्ट्र में 2006 से लागू इस योजना का उद्देश्य राज्य की झीलों और जल स्रोतों का पुनरुद्धार करना है। इसके तहत जल प्रदूषण रोकना, गाद हटाना, जल प्रवाह सुधारना, सौंदर्यीकरण और स्थानीय पारिस्थितिकी का संरक्षण शामिल है।
Published on:
28 Apr 2026 06:06 pm
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