
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Photo: IANS)
मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर जारी घमासान के बीच सोमवार को मंत्रालय में एक अहम बैठक हुई। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में यूनियन नेता शशांक राव, शिवसेना (शिंदे गुट) नेता संजय निरुपम और विभिन्न टैक्सी-ऑटो संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मंत्री सरनाईक ने साफ शब्दों में कहा कि महाराष्ट्र में व्यवसाय करना है तो मराठी बोलना आवश्यक है और वे इस निर्णय से पीछे नहीं हटेंगे।
इस मुद्दे पर मंत्रालय में आज दोपहर मंत्री प्रताप सरनाईक की अध्यक्षता में बैठक की गई, जिसमें मुंबई ऑटोरिक्शा-टैक्सीमेन्स यूनियन के नेता शशांक राव, संजय निरुपम और विभिन्न टैक्सी-ऑटो यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में अधिकांश संगठनों ने मराठी सीखने पर सहमति जताई, लेकिन उन्होंने इसके लिए समय की मांग की।
सरनाईक ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार जरूरत पड़ने पर मराठी सीखने के लिए चालकों को समय देने पर विचार कर सकती है, लेकिन किसी भी तरह की मनमानी या दबाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार किसी की रोजी-रोटी पर असर नहीं डालना चाहती, लेकिन अगर कोई कहता है कि हम महाराष्ट्र में रहेंगे पर केवल हिंदी में ही बात करेंगे, तो यह भी नहीं चलेगा।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अभी समय सीमा बढ़ाने का कोई औपचारिक वादा नहीं किया है। इस संबंध में मंगलवार सुबह साढ़े 10 बजे आरटीओ (RTO) अधिकारियों के साथ बैठक होगी, जिसमें अंतिम फैसला लिया जाएगा।
उधर, राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को इस बैठक का न्योता नहीं भेजा गया था। जिस पर मनसे की ओर से तीखी प्रतिक्रिया दी गई है। मनसे नेता संदीप देशपांडे ने कहा कि पूरी स्थिति को देखते हुए महायुति सरकार मराठी भाषा लागू करने के फैसले से पीछे हटने की तैयारी कर रही है। लेकिन हम इस पर अडिग हैं। ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान होना ही चाहिए।
दरअसल, महाराष्ट्र दिवस यानी 1 मई से लाइसेंसधारी टैक्सी और ऑटो रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा बोलना, लिखना और पढ़ना अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत राज्य के 59 आरटीओ कार्यालयों के जरिए जांच अभियान चलाया जाएगा, जिसमें यह देखा जाएगा कि चालक मराठी बोल, पढ़ और लिख सकते हैं या नहीं।
राज्य सरकार ने साफ किया है कि जिन चालकों को मराठी नहीं आती, उनके लाइसेंस तक रद्द किए जा सकते हैं। इस फैसले के विरोध में मुंबई समेत राज्यभर के कई चालक संगठनों ने 4 मई से हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। राज्य के सबसे बड़े ऑटोरिक्शा-टैक्सीमेन्स यूनियन ने मराठी अनिवार्यता के फैसले के खिलाफ 4 मई से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने यह आदेश वापस नहीं लिया, तो आक्रामक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
अब इस पूरे मामले में अगला बड़ा फैसला आरटीओ अधिकारियों के साथ होने वाली मंगलवार की बैठक के बाद लिया जाएगा। सरकार समय सीमा बढ़ाएगी या सख्ती से नियम लागू करेगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
Published on:
27 Apr 2026 05:01 pm
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