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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए काटे जाएंगे ‘मैंग्रोव’ के हजारों पेड़, कोर्ट ने दी मंजूरी

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए कोर्ट ने एक अहम फैसला लिया हैं। महाराष्ट्र में जब भी कोई ऑथारिटी किसी पब्लिक प्रोजेक्ट के लिए मैंग्रोव के पेड़ों को काटना जरूरी समझती है तो उसे कोर्ट से परमिशन लेनी पड़ती है।
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Updated: 9 Dec 2022, 6:25 PM IST
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Bullet Train

शुक्रवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन (NHSRCL) को मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए मुंबई, पालघर और ठाणे में मैंग्रोव के करीब 20 हजार पेड़ काटने की मंजूरी दे दी है। चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस अभय आहूजा की बेंच ने मैंग्रोव के पेड़ों को काटने की मांग वाली एनएचएसआरसीएल की याचिका को हरी झंडी दे दी। बॉम्बे हाई कोर्ट के साल 2018 के एक आदेश के तहत राज्य भर में मैंग्रोव (दलदलीय भूमि में उगे पेड़ व झाड़ियां) के पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है।

महाराष्ट्र में जब भी कोई ऑथारिटी किसी पब्लिक प्रोजेक्ट के लिए मैंग्रोव के पेड़ों को काटना जरूरी समझती है तो उसे हर बार हाई कोर्ट से परमिशन लेना पड़ता है। कोर्ट के आदेश केमुताबिक जिस इलाके में मैंग्रोव के पेड़ हैं, उसके आसपास करीब 50 मीटर का ‘बफर जोन’ बनाया जाना चाहिए, जिसमें किसी भी निर्माण गतिविधि या मलबे को गिराने की मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए। एनएचएसआरसीएल ने साल 2020 में दायर याचिका में कोर्ट को भरोसा दिया था कि पहले मैंग्रोव के जितने पेड़ों को काटे जाने की योजना थी, वह उनका 5 गुना पेड़ लगाएगा। यह भी पढ़े: महाराष्ट्र में भी लाया जाएगा लव जिहाद के खिलाफ कानून! डिप्टी सीएम फडणवीस ने दिया बड़ा बयान

NGO ने किया था याचिका का विरोध: बता दें कि एनएचएसआरसीएल के भरोसा दिलाने के बावजूद ‘बॉम्बे एन्वायर्नमेंटल ऐक्शन ग्रुप’ नाम के एक एनजीओ ने यह कहते हुए उसकी याचिका का विरोध किया था कि नए लगाए गए पौधों के जिंदा रहने की दर के बारे में कोई अध्ययन नहीं हुआ है, और यह भी नहीं पता है कि पेड़ों के काटे जाने का पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा। एनएचएसआरसीएल ने एनजीओ द्वारा जताई गई आपत्तियों को रद्द करते हुए दावा किया था कि उसने इस प्रोजेक्ट के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर जरूरी अप्रूवल मिल गया था और जिसकी वजह से होने वाले नुकसान की भरपाई पौधे लगाकर की जाएगी।

बुलेट ट्रेन से कम हो जाएगा सफर का समय: अहमदाबाद और मुंबई के बीच प्रस्तावित 508 किलोमीटर लंबे हाई स्पीड रेल कॉरिडोर से दोनों शहरों के बीच का सफर का समय 6.5 घंटे से घटकर 2.5 घंटे होने की उम्मीद है। कहा जा रहा है कि सफर के समय में आई इस कमी से पूरे इलाके के डेवलपमेंट की स्पीड तेज हो सकती है और साथ ही लोगों को भी काफी सहूलियत मिल सकती है।

Updated on:
9 Dec 2022, 6:25 PM IST
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