मुंबई की दो लड़कियों ने फिलहाल शहर की सफाई का जिम्मा उठाया है। दोनों दोस्तों ने शहर से गंदगी और प्रदूषण को समाप्त करने के लिए एक एनजीओ भी खोला है। जिसका नाम आइका फॉउंडेशन है, इस एनजीओ में लितिशा बगाड़िया और सिया जोशी के हमउम्र कई युवा जुड़े हैं। जो मुफ्त में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई (Mumbai) की सड़कों, समुद्री किनारे पर मौजूद गंदगी से परेशान होकर मुंबई की दो 16 साल की सहेलियों ने मिलकर सफाई के लिए एक एनजीओ बनाया है। दोनों दोस्तों ने सिर्फ सोलह साल की उम्र में यह एनजीओ (NGO) बनाया है। दसवीं कक्षा में पढ़ते हुए दोनों ने एनजीओ बनाने का निर्णय लिया था। फिलहाल दोनों लड़कियां 11वीं कक्षा में पहुंच गई हैं। आमतौर पर इस उम्र में बच्चे खेलकूद और मौज-मस्ती में मशगूल रहना पसंद करते हैं। हालांकि, लितिशा बगाड़िया और सिया जोशी ने अपने लिए जमाने से अलग रास्ता अपनाया है।
दोनों बच्चियां जिंदगी में अपने टारगेट को भी पूरा करना चाहती हैं और पढ़ाई में कोई कमी नहीं रखना चाहती हैं। इसलिए दोनों लड़कियां पढ़ाई और एनजीओ के काम में एक सामंजस्य बनाकर चलती हैं। एक साल पहले शुरू हुए इस एनजीओ में अब कई लोग जुड़ चुके हैं। मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद, चेन्नई और हैदराबाद के साथ-साथ नाइजेरिया, घाना से लितिशा और सिया के हमउम्र फ्रेंड अपने-अपने हिसाब से सहयोग करते हैं। अब तक 31 बच्चों की टीम तैयार हो गई है। यह भी पढ़े: नासिक-सिन्नर हाईवे पर हुआ भयानक हादसा, बस ने मारी गाड़ियों को टक्कर; 4 लोगों की मौत
लितिशा और सिया दोनों ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान वो इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही थीं लेकिन बाहर निकलने पर पाबंदी होने के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा था। इसलिए उन्होंने इस मुहिम की शुरुआत ऑनलाइन ही की। आसपास की गंदगी को देखकर अपने जैसे बच्चों को ऑनलाइन जोड़ने की कोशिश की। पिछले साल 31 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर लितिशा और सिया ने 'आइका फाउंडेशन' की नींव रखी।
जिसके अंतर्गत वे पर्यावरण, कचरा और गंदगी जैसी मुंबई की समस्याओं पर ध्यान देती हैं। होली के समय में चाहे पानी की बर्बादी को रोकने की मुहिम हो या फिर दिवाली पर पटाखे न फोड़ने की लोगों से अनुरोध हो। उनकी इस लगन और मेहनत को लोगों का भी समर्थन मिलना शुरू हो गया है। अप्रत्याशित समर्थन से उन्होंने इस काम को अब बड़े स्तर पर करने का निर्णय लिया है।
बता दें कि दोनों दोस्त बड़े फेस्टिवल जैसे गणेशोत्सव के दौरान सार्वजनिक मंडलों में चढ़ाए जाने वाले फूलों को भी वहां से उठाकर एक वेस्ट रिसाइक्लिंग यूनिट को सौंप देती थी। इसके दो फायदे हुए एक तो मुंबई में होने वाली गंदगी को कुछ हद तक कम किया जा सका। वहीं दूसरी तरफ इन फूलों से इत्र और खाद भी बनाया गया। इसके अलावा इत्र और खाद को बेचकर आने वाले पैसे को गरीबों के लिए उपयोग किया गया।
लितिशा और सिया के घरवालों ने उन्हें उनकी इस मुहिम को आगे बढ़ाने में भी अपना पूरा सहयोग और सपोर्ट दिया है। लितिशा बगाड़िया के पिता एक बिजनेसमैन हैं तो वहीं सिया जोशी के पिता एक अच्छी नौकरी करते हैं। दोनों सहेलियां बताती हैं कि परिवार के समर्थन के बिना यह काम संभव नहीं था।
इन प्रोजेक्ट्स पर किया काम: बता दें कि दोनों सहेलियों ने मिलकर बीच क्लीनअप और प्लास्टिक रीसाइक्लिंग ड्राइवर की मुहिम चलाई थी। जिसमें करीब 70 से अधिक वॉलिंटियर्स ने 100 किलो से ज्यादा कचरा इकट्ठा किया था। जिसे बाद में रीसाइक्लिंग के लिए भेजा गया था।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इस एजीओ ने ई-वेस्ट कलेक्शन ड्राइव किया था। जिसके तहत 50 किलो ई-वेस्ट को दो सोसायटियों से एकत्र किया गया था। इसे भी रीसाइक्लिंग के लिए भेजा गया था।
दोनों ने मिलकर मुंबई में होने वाले गणेश गणेशोत्सव के दौरान 11 दिनों तक एक मुहिम चलाई थी। इस मुहिम के तहत बड़े सार्वजनिक पंडालों में एकत्र होने वाले फूलों के वेस्ट को भी एजीओ ने इकट्ठा किया था। तकरीबन 200 किलो फूलों का कचरा एकत्र करने के बाद उसे रीसाइक्लिंग के लिए भेजा गया था।
गणेश विसर्जन के बाद चौपाटी पर होने वाली गंदगी को भी समाप्त करने के लिए बच्चों के इस एनजीओ ने एक स्पेशल मुहिम चलाई थी। इस मुहिम के तहत दादर चौपाटी और माहिम चौपाटी पर 500 किलो कचरा इकट्ठा कर रीसाइक्लिंग के लिए भेजा गया था।