Maharashtra Politics : शिवसेना (उद्धव ठाकरे) सचिव संजय पाटिल ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी के बड़े नेताओं पर दरकिनार करने का आरोप भी लगाया।
महाराष्ट्र में आगामी स्थानीय और नगर निकाय चुनाव से पहले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी शिवसेना (यूबीटी) को लगातार झटके लग रहे हैं। अब पार्टी के राज्य सचिव डॉ. संजय लाखे पाटिल (Sanjay Lakhe Patil) ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इससे मराठवाड़ा क्षेत्र में उद्धव गुट को बड़ा झटका लगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे ने उन्हें लोकसभा चुनाव का टिकट देने का वादा किया था, लेकिन वह वादा निभाया नहीं गया। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संजय राउत ने एनसीपी (शरद पवार) नेता जयंत पाटिल से एक विशेष समझौता करके सांगली लोकसभा सीट ले ली और जानबूझकर पार्टी को हार की ओर धकेल दिया।
संजय पाटिल ने रविवार को पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा की। उन्होंने यह कदम पार्टी द्वारा जालना लोकसभा सीट से टिकट न दिए जाने से नाराज होकर उठाया। साथ ही पार्टी के बड़े नेताओं पर नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया।
पाटिल ने कहा, “मुझे बताया गया था कि सांगली के बदले जालना सीट हमारे पास रहेगी। लेकिन संजय राउत ने अपने एजेंडे के लिए ऐसा नहीं होने दिया।“
संजय पाटिल लोकसभा चुनाव से करीब एक साल पहले कांग्रेस छोड़कर शिवसेना (यूबीटी) में शामिल हुए थे, और तब से जालना से अपनी दावेदारी को लेकर सक्रिय थे। हालांकि, इस सीट से कांग्रेस के कल्याण काले को उम्मीदवार बनाया गया और उन्होंने चुनाव जीत लिया।
पाटिल ने शिवसेना (यूबीटी) नेता व विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दानवे ने उनके विचारों को हाईजैक कर खुद उसका श्रेय लिया और उन्हें पार्टी में दरकिनार कर दिया।
अपने इस्तीफा पत्र में उन्होंने कहा कि अंबादास दानवे ने यह सुनिश्चित किया कि जीतने योग्य जालना लोकसभा सीट उनके पास न आए। इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मराठवाड़ा में दानवे द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम की मूल संकल्पना उनकी थी। लेकिन वह चुराकर अपना बताकर अंबादास दानवे मुफ्त में वाहवाही लूट रहे हैं। संजय पाटिल के इन आरोपों ने उद्धव खेमे में बढ़ते असंतोष और आंतरिक कलह को उजागर कर दिया है, जो आगामी चुनावों के लिए पार्टी के लिए अच्छा संकेत नहीं है।