Uddhav Thackeray Shiv Sena Jolt: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर दल-बदल का दौर तेज होता नजर आ रहा है। इसी बीच विदर्भ के वाशिम जिले में शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट को बड़ा झटका लगा है।
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर दलबदल और बड़े राजनीतिक उलटफेर का दौर शुरू हो गया है। आगामी चुनावों से ठीक पहले विदर्भ के वाशिम जिले में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट को करारा झटका लगा है। वाशिम के पूर्व शिवसेना जिला प्रमुख और दिग्गज स्थानीय नेता सुरेश मापारी भाजपा में शामिल हो गए हैं। उद्धव गुट से इस्तीफा देने के महज दो दिन बाद ही उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया है। उनके साथ जिले के करीब 250 प्रमुख पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी कमल उठा लिया है।
वाशिम के पूर्व शिवसेना (उद्धव गुट) जिला प्रमुख सुरेश मापारी ने पद से इस्तीफा देने के महज दो दिन बाद रविवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ज्वॉइन कर ली। मुंबई के नरीमन पॉइंट कार्यालय में आयोजित प्रवेश कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने उन्हें पार्टी में शामिल कराया। खास बात यह रही है कि सुरेश मापारी अकेले बीजेपी में नहीं जा रहे, बल्कि उनके साथ करीब 250 कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी कमल का दामन थामने वाले हैं।
जिला प्रमुख पद से इस्तीफा देने के बाद सुरेश मापारी ने अपने समर्थकों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक के बाद उनके नेतृत्व में करीब 200 से 250 प्रमुख पदाधिकारी, सरपंच और कार्यकर्ताओं का बड़ा काफिला मुंबई के लिए रवाना हुआ। इसे वाशिम की राजनीति में बड़ी हलचल माना जा रहा है।
दो दिन पहले ही ठाकरे गुट ने वाशिम जिला प्रमुख पद की जिम्मेदारी सुरेश मापारी से लेकर बालाजी वानखेडे को सौंप दी थी। इसके बाद से ही मापारी की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ठाकरे गुट के स्थानीय सांसद संजय देशमुख की कार्यशैली और पार्टी के अंदरूनी राजनीति को लेकर भी सुरेश मापारी पिछले कुछ समय से असंतुष्ट थे। इससे पहले उनके एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना में जाने की चर्चाएं भी तेज थीं, लेकिन आखिरकार उन्होंने भाजपा का दामन थामने का फैसला किया।
सुरेश मापारी को वाशिम जिले का प्रभावशाली नेता माना जाता है। वे पहले जिला परिषद सदस्य, वित्त एवं निर्माण समिति के सभापति और कृषि उत्पन्न बाजार समिति के सभापति जैसे कई अहम पद संभाल चुके हैं। ग्रामीण इलाकों में उनका मजबूत जनाधार और कार्यकर्ताओं का बड़ा नेटवर्क माना जाता है। ऐसे में उनका भाजपा में शामिल होना स्थानीय राजनीति में ठाकरे गुट को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।