जनपद में जल निगम में करोड़ों रुपये का घोटाला जल्द ही सामने आ सकता है।
मुजफ्फरनगर। जनपद में जल निगम में करोड़ों रुपये का घोटाला जल्द ही सामने आ सकता है। दरअसल, ठेकेदारों की शिकायत पर जिलाधिकारी द्वारा कराई गई जांच में लगभग 6 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता होने के तथ्य प्रकाश में आये है। हालांकि जांच अभी जारी है, जिसमें पैसे के अभाव में पिछले कई सालों से चल रही विभिन्न परियोजनाओं के अधर में लटक गई और साथ ही अधिशाषी अभियंता द्वारा ठेकेदारों का भुक्तान ना करने के बाद हुई शिकायत के बाद पैसे की गड़बड़ी का सच सामने आया।
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दरअसल, राष्टीय ग्रामीण योजना के अंतर्गत सरकार के द्वारा भेजी गई धनराशि से 6 करोड़ की मोटी रकम उड़नछू हो गई है। जिस कारण धन के आभाव में जल निगम की चल रही विभिन्न परियोजनाएं भी पूरी नहीं हो पा रही है। इस बात को खुद जनपद के अधिकारी ही बता रहे हैं। जिनका कहना है कि जल निगम के खाते से 6 करोड़ की रकम गायब पाई गई है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि ये रकम डायवर्ड कर शायद किसी अन्य काम में खर्च की गई है। लेकिन कहीं न कहीं अब इसमें घोटाले की बू आने लगी है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।
जिला विकास अधिकारी मोती लाल व्यास ने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्री ग्रामीण पेयजल योजना के अंतर्गत गांवो में योजनाएं चल रही हैं। लेकिन धन के आभाव में पूरी नहीं हो पा रही। उन्होंने बताया कि विभाग का लगभग 6 करोड़ रुपये डायवर्ट हुआ है और जो पिछले अधिशाषी अभियंता हैं उन्होंने इस पैसे को कहीं और खर्च कर दिया है। हमारे हिसाब से जल निगम के पास 18 करोड़ 51 लाख रुपये होने चाहिए थे। लेकिन बैंक के खाते में मात्र 12 करोड़ 66 लाख रुपये की राशि ही दिख रही है। जिसके मुताबिक लगभग 6 करोड़ की राशि डायवर्ड है। जिस कारण योजना पूरी नहीं हो पा रही है। इसमें जिलाधिकारी साहब द्वारा जांच कराई जा रही है।
वहीं भुक्तान ना होने के कारण जल निगम में काम कर रहे ठेकेदार भी परेशान घूम रहे हैं। ठेकेदारों का कहना है कि भुगतान न होने के कारण उन्हें परिवार पलने के लाले पड़े हैं। ठेकेदारों का आरोप है कि अधिशाषी अभियंता ने उनसे भुगतान के नाम पर रिश्वत भी ले ली उसके बाद भी उनका भुक्तान नहीं कर रहे है। ठेकेदार जितेंद्र ने बताया कि मैंने जिले में हैंडपंप लगाने का काम किया था लेकिन तीन साल हो गए मेरा भुगतान नहीं किया गया। जबकि मैंने 10 फीसदी कमीशन भी दिया है और जिलाधिकारी ने भी हमारे काम की जांच कराकर क्लीन चिट दे दी।