लोकसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) कस गठबंधन हो चुका है
मुजफ्फरनगर। लोकसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) कस गठबंधन हो चुका है। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) का भी इस गठबंधन का हिस्सा बनना तय माना जा रहा है। माना जा रहा है कि रालोद मुखिया अजित सिंह मुजफ्फरनगर और उपाध्यक्ष जयंत चौधरी गठबंधन की तरफ से बागपत से चुनाव लड़ सकते हैं।
अजित सिंह के चुनाव लड़ने की चर्चा
मुजफ्फरनगर से रालोद प्रमुख अजित सिंह के चुनाव लड़ने की चर्चा है। यह चर्चा पिछले विधानसभा चुनाव के बाद ही शुरू हो गई थी। तब अजित सिंह ने कई बार मुजफ्फरनगर का दौरा किया था और गांवों का दौरा किया था। अजित सिंह ने 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद ही महागठबंधन के लिए भागदौड़ शुरू कर की थी। बई बार मुजफ्फरनगर और वेस्ट यूपी के जिलों का दौरा कर उन्होंने महागठबंधन का हिस्सा होने की बात भी कही थी। माना जा रहा है कि वह मुजफ्फरनगर से मैदान में उतर सकते हैं। रालोीद प्रवक्ता अभिषेक चौधरी गुर्जर का कहना है कि भाजपा सांसद संजीव बालियान जनता के भरोसे पर खरे नहीं उतरे हैं। अजित सिंह लाखों वोटों से जीत दर्ज करेंगे। महागठबंधन होने से भाजपा का सफाया हो जाएगा।
भाजपा से संजीव बालियान को मिल सकता है टिकट
वहीं, भाजपा की बात करें तो मुजफ्फरनगर से दो-तीन लोगों के नाम चल रहे हैं। इनमें वर्तमान सांसद डॉ. संजीव बालियान और डॉ. प्रियंवदा तोमर का नाम भी चल रहा है। डॉ. संजीव बालियान यहां से सांसद हैं और पिछले लोकसभा चुनाव में बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। टिकट की रेस में उनका नाम सबसे आगे चल रहा है। वह भारत सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। उनकी सक्रियता को देखकर माना जा रहा है कि वह यहां से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो अजित सिंह का सामना पूर्व केंद्रीय मंत्री से हो सकता है।
जातीय समीकरण
पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी संजीव बालियान को 6,53,391 वोट मिले थे। उन्होंने चार लाख वोटों से विजय हासिल की थी। उस चुनाव में बसपा प्रत्याशी कादिर राणा को 2,52,441 और सपा प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह गुर्जर को 1,60,810 मत मिले थे। इस लोकसभा सीट पर दलित वोटरों की संख्या 2 लाख से अधिक है जबकि दलित वोटरों की संख्या 5 लाख से अधिक है। यहां जाट वाेटरों कह संख्या भी 2 लाख से ज्यादा है।