फिल्म पर बैन लगाने से देश में कट्टरता को मिलेगा बढ़ावा
मुज़फ्फरनगर. ककरौली गांव में आयोजित शिया मुसलमानों की एक मजलिस में कल्कि धाम के संस्थापक आचार्य प्रमोद कृष्णन ने कहा कि पद्मावती फिल्म को अगर देश के सामने दिखाया जाने का फैसला होता है तो यह भारत सरकार का होगा। अगर पद्मावती के विरोध को देखते हुए भारत सरकार फिल्म को नहीं दिखाने का फैसला लेती है तो इससे देश में कट्टरता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि मैं समझता हूं कि हमारे देश में भावनाओं के नाम पर जो एक कट्टरता चल रही है। सरकार के इस तरह के फैसले से उसे और बढ़ावा मिलेगा।
भावनाओं को दुखाने की अनुमति नहीं
किसी की भी भावनाओं को दुखाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, लेकिन सरेआम किसी भी आदमी के सर की कीमत लगाने को भी सही नहीं ठहराया जा सकता है, क्योंकि यह देश हिंदुस्तान है। ऐसे तालिबानी फरमान से देश नहीं चलेगा। संजय लीला भंसाली के सिर की कीमत लगा देना दीपिका पादुकोण की नाक काटने की कीमत लगा देना। रोज टेलीविजन पर इस तरह के वाहियात बयान आना भारत की संस्कृति और सभ्यता के खिलाफ है। इसलिए मैं इसके पक्ष में नहीं हूं।
400 सालों से होती आ रही मजलिस
गांव ककरौली में एक मजलिस का आयोजन किया गया। ये मजलिस ककरौली में पिछले 400 सालों से होती आ रही है। जिसमें हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों अकीदतमन्दों ने हिस्सा लिया। मजलिस की शुरुआत हैदराबाद से आए मौलाना सैयद आबिद और कल्कि धाम के संस्थापक आचार्य प्रमोद कृष्णन ने अपनी तकरीरों की। इस दौरान आचार्य ने अपनी तकरीर में कहा कि मौला अली केवल मुस्लिमों के ही नहीं है, बल्कि हिंदुओं के भी इतने ही हैं, जितना मुस्लिमों के । वहीं, मौलाना सैयद आबिद ने अपनी तकरीर में मुस्लिम लड़कियों को गाने से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने लड़कियों को हिजाब में रहने को कहा और साथ ही लोगों को दीन के रास्ते पर चलने की भी सलाह दी।