
Shahjadi Murder Case: मुजफ्फरनगर में शहजादी हत्याकांड में पति नदीम को फांसी की सजा सुनाने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर चर्चा में हैं। अदालत ने नदीम पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। फैसले में जज ने न्यायपालिका पर दबाव और अपराधियों के प्रभाव को लेकर कई अहम बातें लिखीं। उन्होंने कहा कि मैं मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलाना नहीं। जज ने फैसले में खुद को और परिवार को मिली जान से मारने की धमकियों का भी जिक्र किया है।
रवि कुमार दिवाकर ने अपने फैसले में कहा कि मैं मरना पंसद करूंगा, डरपोक जज कहलवाना नही पसंद करूंगा। जब तक मैं अपने सिद्धान्तों पर चल सकता हूं। तब तक सर्विस करूंगा अन्यथा त्यागपत्र दे दूंगा। जब तक मैं जज की कुर्सी पर हूं तो फैसला/निर्णय लेने का अधिकार भी एकमात्र मेरा ही होगा। उन्होंने आगे लिखा कि मुझे मेरे माता-पिता ने शुरू से यह शिक्षा दी है कि सदैव भगवान से डरो और अन्य किसी व्यक्ति से नहीं।
अगर मैं किसी और से डरूंगा तो आम जनता का भरोसा कोर्ट से उठ जाएगा। अगर मैं माफियाओं से डरता हूं तो मेरे लिये यह उचित होगा कि मैं इस पवित्र न्यायिक संस्था से त्यागपत्र दे दूं।
फैसले में मुजफ्फरनगर की अदालत में हुई विक्की त्यागी की हत्या और जिले में गैंगस्टरों व माफियाओं के प्रभाव का भी जिक्र किया गया। जज ने लिखा कि कभी शौकीन गैंग का आतंक हुआ करता था। हाल ही में इसी कोर्ट ने शौकीन के भाई शाहनवाज को फांसी की सजा दी है।ज्ञानवापी मामले के बाद खुद को और परिवार को मिली धमकियों का भी उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि आरोपी अदनान खान ने इंस्टाग्राम पर धमकी दी थी। इसके अलावा उन्होंने सुरक्षा में स्थानीय पुलिस की लापरवाही का भी आरोप लगाया।
मामला 23 जुलाई 2018 की रात का है। करीब 8:30 बजे नदीम ने अपनी पत्नी शहजादी के साथ मारपीट और गाली-गलौज की। आरोप है कि इसके बाद उसने शहजादी पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। गंभीर हालत में उसे इलाज के लिए दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां 28 जुलाई 2018 को उसकी मौत हो गई।
मामले की सुनवाई के दौरान शहजादी के माता-पिता और भाई अपने बयानों से मुकर गए थे। इसके बावजूद 24 जुलाई 2018 को सफदरजंग अस्पताल में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने शहजादी ने जो आखिरी बयान दिया था, वह अदालत के लिए निर्णायक साबित हुआ। उसने अपने बयान में कहा था कि उसके पति नदीम ने ही उस पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगाई थी।
शहजादी ने अपने आखिरी बयान में दहेज की मांग या प्रताड़ना का कोई जिक्र नहीं किया था। इसी आधार पर कोर्ट ने नदीम को दहेज हत्या के आरोप से बरी कर दिया। मामले में आरोपी ननद सोनी को भी सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। वहीं, आरोपी सास शमशीदा की पहले ही मौत हो चुकी है।
जज ने फैसले में लिखा कि वर्तमान समय में मैं कुछ व्यवहार से बहुत आहत और दुखी हूं। अपने व्यक्तिगत विचार भी व्यक्त करने से अपने आपको नही रोक पा रहा हूं। पता नहीं जिन लोगों ने मेरे साथ यह व्यवहार किया है वह भगवान में विश्वास करते हैं या नहीं, लेकिन जो व्यवहार उन्होंने मेरे साथ किया है, जब वह अपनी अंतरात्मा में झाकेगें तो अपने आपको कभी माफ नही कर पाएंगें।
उन्होंने आगे लिखा कि कोई व्यक्ति दुनिया को बेवकूफ बना सकता है, लेकिन अपनी अंतरात्मा को बेवकूफ नही बना सकता। ऐसा व्यवहार करने का कारण माफियाओं/गैंगस्टरों/अपराधियों को बचाना है। ऐसा क्यों हुआ, इसकी संपूर्ण जानकारी मुझे है, लेकिन इस वक्त बोलना ठीक नही होगा, क्योंकि पद की भी मर्यादा होती है।
रवि कुमार दिवाकर ने साल 2009 में न्यायिक सेवा शुरू की थी। संभल और बरेली में तैनाती के दौरान उन्होंने हत्या के अलग-अलग मामलों में 13 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया था। मुजफ्फरनगर में करीब 9 महीने के कार्यकाल में नौ गंभीर हत्याकांडों में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई। इसके साथ ही उनके न्यायिक करियर में मृत्युदंड पाने वाले दोषियों की संख्या 36 हो गई है।
मुजफ्फरनगर में समीर सैफी हत्याकांड में तीन, शेखर हत्याकांड में चार, राजेश देवी और उनके छह वर्षीय बेटे हिमांशु की हत्या के मामले में एक, राजेंद्र सैनी हत्याकांड में दो, होमगार्ड रतिराम की हत्या में एक, किसान राज सिंह हत्याकांड में चार, सालिम हत्याकांड में शाहनवाज को और शामली के पवन हत्याकांड में चार दोषियों को मृत्युदंड दिया गया। 7 सितंबर को नदीम को सजा सुनाए जाने के बाद यह संख्या 23 पहुंची।