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मुजफ्फरनगर: हाउस अरेस्ट के बावजूद सहारनपुर पहुंचे सपा सांसद हरेंद्र मलिक, 5 दारोगा समेत 14 पुलिसकर्मी निलंबित

Harendra Malik: मुजफ्फरनगर में अखिलेश यादव की फोटो के साथ दंगों से जुड़े पोस्टर लगाए जाने और सपा सांसद हरेंद्र मलिक के सहारनपुर पहुंचने के बाद पुलिस पर बड़ी कार्रवाई हुई। पांच दारोगा समेत 14 पुलिसकर्मी निलंबित किए गए।
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मुजफ्फरनगर

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Ankit Sai

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Updated: 8 Sep 2026, 8:38 AM IST

Muzaffarnagar News

सपा सांसद हरेंद्र मलिक (ANI Photo)

Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर दंगे की 13वीं बरसी पर लगे पोस्टरों और सपा सांसद हरेंद्र मलिक के हाउस अरेस्ट के बावजूद सहारनपुर पहुंचने के मामले ने पुलिस महकमे में हलचल बढ़ा दी है। सांसद के पुलिस सुरक्षा घेरे से निकलकर सहारनपुर पहुंचने और ध्वस्त मस्जिद स्थल का निरीक्षण करने के बाद देर रात बड़ा एक्शन हुआ। एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में पांच दारोगा समेत 14 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। दोनों मामलों में पुलिस की निगरानी और गश्त व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।

हाउस अरेस्ट के बाद सहारनपुर पहुंचे सांसद

समाजवादी पार्टी ने पहले ही अपने प्रतिनिधिमंडल के सहारनपुर पहुंचने और मस्जिद ध्वस्तीकरण के मामले में अधिकारियों से मुलाकात करने का ऐलान किया था। इसी को देखते हुए प्रतिनिधिमंडल में शामिल नेताओं को सुबह से ही हाउस अरेस्ट कर दिया गया था। सपा सांसद हरेंद्र मलिक को भी मुजफ्फरनगर स्थित उनके आवास पर पुलिस की निगरानी में रखा गया था। इसके बावजूद वह पुलिस टीम को चकमा देकर सोमवार को सहारनपुर कलक्ट्रेट पहुंच गए। यहां उन्होंने ध्वस्त मस्जिद स्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों से मुलाकात भी की।

सांसद के सुरक्षा घेरे से बाहर निकलकर सहारनपुर पहुंचने के बाद पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने देर रात संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की। सांसद के हाउस अरेस्ट से निकलकर सहारनपुर पहुंचने के मामले में शहर कोतवाली के दारोगा को निलंबित किया गया है।

अखिलेश यादव की फोटो के साथ लगे पोस्टर, न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे

दूसरी ओर, सोमवार को मुजफ्फरनगर दंगों को हुए 13 साल पूरे हो गए। इस दौरान मुजफ्फरनगर और आसपास के कई शहरों में अखिलेश यादव की फोटो के साथ दंगों से जुड़े पोस्टर लगाए गए। पोस्टरों पर लिखा था कि न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे। रोडवेज बस स्टैंड समेत शहर के कई प्रमुख चौराहों पर पोस्टर दिखाई देने के बाद पुलिस-प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस ने तत्काल इन्हें हटवाया। इसके बाद सीसीटीवी कैमरों की मदद से पोस्टर लगाने वालों की तलाश शुरू की गई।

जांच में सामने आया कि कुछ युवक रविवार रात बस से मुजफ्फरनगर पहुंचे थे। उन्होंने रोडवेज बस स्टैंड और शहर के दूसरे स्थानों पर पोस्टर लगाए और फिर वहां से निकल गए।

पोस्टर कांड में आठ पुलिसकर्मी निलंबित

सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह पोस्टर लगाए जाने से पुलिस की गश्त और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए। एसएसपी ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच एसपी सिटी को सौंपी। इसके बाद पुलिसकर्मियों की ड्यूटी और गश्त व्यवस्था की जांच शुरू हुई। देर रात सिविल लाइन थाने के पुलिसकर्मियों और एलआईयू के एक दारोगा समेत आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। इस तरह सांसद के हाउस अरेस्ट से निकलने और मुजफ्फरनगर में दंगों से जुड़े पोस्टर लगाए जाने, दोनों मामलों में पुलिस विभाग ने कुल 14 कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है।

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