
सहारनपुर में लगे अखिलेश यादव के पोस्टर (IANS Photo)
Saharanpur Mosque Demolition: सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। सोमवार को सपा, कांग्रेस और AIMIM का प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर पहुंचने वाला है। इससे पहले शहर और आसपास के इलाकों में अखिलेश यादव की तस्वीर वाले पोस्टर लगाए गए, जिन पर साल 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र करते हुए लिखा गया, 'न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे।' हालांकि पुलिस ने पोस्टर हटवा दिए हैं। वहीं सहारनपुर जाने वाले सपा विधायक अतुल प्रधान को उनके घर पर रोक दिया गया है। AIMIM ने भी अपने नेताओं को हाउस अरेस्ट किए जाने का दावा किया है।
मस्जिद गिराए जाने के तीसरे दिन और मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी के बीच सहारनपुर के अलावा शामली और मुजफ्फरनगर में भी अखिलेश यादव की तस्वीर वाले पोस्टर लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। पोस्टरों में 7 सितंबर 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़ी तस्वीरों के साथ अखिलेश यादव की तस्वीर लगाई गई थी। पुलिस ने पोस्टर हटवा दिए हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इन्हें किस व्यक्ति या संगठन ने लगाया था।
मस्जिद ध्वस्तीकरण के तीसरे दिन विपक्षी दलों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को सहारनपुर पहुंचने वाला है। सपा, कांग्रेस और AIMIM के बड़े नेता इसमें शामिल होंगे। प्रतिनिधिमंडल मंडलायुक्त और दूसरे प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात करेगा। इस दौरान मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली जाएगी।
इस बीच मेरठ से सपा विधायक अतुल प्रधान को भी पुलिस ने घर से बाहर जाने से रोक दिया है। वह सोमवार को सहारनपुर जाने वाले थे। सुबह पुलिस उनके घर पहुंची और उन्हें बाहर जाने की अनुमति नहीं दी। उनके घर के बाहर सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। बाहर से किसी को अंदर जाने और अंदर से किसी को बाहर आने नहीं दिया जा रहा है।
AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने मेरठ में मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि पार्टी की ओर से वकीलों का एक प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर जाने वाला था, लेकिन पुलिस ने उन्हें रात में ही हाउस अरेस्ट कर लिया। उन्होंने कहा कि रात के अंधेरे में हमको कैद कर देना मौलिक अधिकारों का हनन है, हम लोग कानूनी पहलू को समझने के लिए वहां पर जा रहे थे और यह वकीलों का अधिकार भी है। लेकिन जिस प्रकार से घरों में कैद किया गया है यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। हमें भारत के संविधान और न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है, हमें न्याय जरूर मिलेगा।
सहारनपुर में शनिवार को करीब 16 घंटे तक बुलडोजर चलाकर मस्जिद को ढहाया गया था। रविवार सुबह तक मलबा हटाने का काम पूरा किया गया। प्रशासन का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद मस्जिद गिराई गई। वहीं मस्जिद पक्ष का आरोप है कि उसे हाईकोर्ट में अपील करने का मौका नहीं दिया गया। मस्जिद पक्ष ने कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की बात कही है।
मुस्लिम धर्मगुरुओं और मस्जिद पक्ष का दावा है कि यह मस्जिद करीब 100 साल पुरानी थी। उनका कहना है कि 70 साल पुराने वक्फ के दस्तावेजों में भी मस्जिद का जिक्र मौजूद है।
Updated on:
7 Sep 2026, 12:17 PM IST
Published on:
7 Sep 2026, 12:17 PM IST
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