
ध्वस्तीकरण के बाद मिट्टी को ठीक करते कर्मचारी ( फोटो पत्रिका )
saharanpur mosque demolition case सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में हुए मस्जिद ध्वस्तीकरण एक्शन के खिलाफ सहारनपुर में सोमवार आज समाजवादी का एक प्रतिनिधि मंडल प्रशासनिक अधिकारियों से मिलेगा। सपा नेताओं के अनुसार सपा का प्रतिनिधि मंडल पैदल मार्च भी करेगा। उधर एलआइयू की रिपोर्ट के बाद पुलिस प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है कि समाजवादियों को इस मामले में राजनीति करने से रोका जाएगा और उन्हे सड़क पर नहीं उतरने दिया जाएगा। इसके लिए पहले ही समाजवादी पार्टी के नेताओं को हाउस अरेस्ट कर लिया गया है।
समाजवादी पार्टी के 22 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल को लेकर एक लिस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। पत्रिका इस लिस्ट की पुष्टि नही करता है। इल लिस्ट में उसमें लिखा गया है कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देशों पर यह पत्र जारी किया जा रहा है। आगे लिखा गया है कि, एक प्रतिनिधिमंडल 7 सितंबर 2026 को सहारनपुर पहुंचेगा और सहारनपुर कलेक्ट्रेट में 119 साल पुरानी मस्जिद के ध्वस्तीकरण के मामले में कमिश्नर से मिलेगा। लैटर में यह भी लिखा गया है कि 5 सितंबर की रात को अंधेरे में बुलडोजर चलाकर मस्जिद को गिरा दिया गया जबकि 4 सितंबर को जिला प्रशासन ने समाजवादी पार्टी के लोगों को यह आश्वासन दिया था की मस्जिद केवल सील की जाएगी गिराई नहीं जाएगी। इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों से मिलने वाले प्रतिनिधि मंडल में लाल बिहारी यादव नेता प्रतिपक्ष विधान परिषद उत्तर प्रदेश, चौधरी अब्दुल वाहिद जिला अध्यक्ष सहारनपुर, हाजी नवाब अंसारी महानगर अध्यक्ष सहारनपुर, सांसद हरेंद्र मलिक, सांसद इकरा हसन, चौधरी रूद्रसेन राष्ट्रीय महासचिव समाजवादी पार्टी, हाजी फजलुर रहमान पूर्व सांसद, अतुल प्रधान विधायक, आशु मलिक विधायक, उमर अली खान विधायक, रामजीतार सैनी विधायक, किरण पाल कश्यप एमएलसी, माविया अली पूर्व विधायक, राहुल भारती राष्ट्रीय अध्यक्ष समाजवादी अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ, मांगेराम कश्यप पूर्व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री, विनीत तेजियान पूर्व मंत्री, सायन मसूद नेता समाजवादी पार्टी, फैसल सलमानी सदस्य राज्य कार्यकारिणी समाजवादी पार्टी, अभिषेक उर्फ टिंकू अरोड़ा नेता समाजवादी पार्टी, जिया चौधरी जिला अध्यक्ष समाजवादी पार्टी मुजफ्फरनगर, ओसामा गाड़ा जिला अध्यक्ष समाजवादी पार्टी अल्पसंख्यक सभा, काशिफ अली विधानसभा अध्यक्ष समाजवादी पार्टी सहारनपुर नगर के नाम दिए गए हैं।
मस्जिद की बिल्डिंग ढहाए जाने के बाद मस्जिद के नीचे से जो कुआ मिला है उसको लेकर सभी के मन में तरह-तरह के सवाल हैं। सभी लोग अब कुए को लेकर अलग-अलग तरह के दावें कर रहे हैं। कुछ लोग कुए मिलने के बाद इस बात दावा कर रहे हैं कि इससे पता चलता है कि मस्जिद अवैध है तो कुछ लोग कह रहे हैं कि कुआ मिलना इस बात की निशानी है कि मस्जिद वैध है। यह कुआ कितना पुराना है। कुएं का क्या इतिहास है। इन सब बातों का पता लगाया जा रहा है। कुआ मिलने के बाद इसके दस्तावेजों की भी तलाश तेज हो गई है। दरअसल पुराने समय में पटवारी यानी लेखपाल हर छह महीने बाद कुए का निरीक्षण कर उसकी रिपोर्ट दिया करते थे। अब उन दस्तावेजों की भी तलाश की जा रही है। उधर एएसआई यानी पुरातत्व विभाग की टीम भी इसकी जांच करेगी कि कुए में कितनी पुरानी ईंटें हैं। अब देखना यह होगा कि पुरातत्व विभाग की टीम इस मामले में क्या रिपोर्ट पेश करती है।
इस मामले में शिकायत देवबंद के रहने वाले बजरंगदल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने की थी। विकास त्यागी की शिकायत के बाद ही मस्जिद की वैधता पर सवाल खड़े हुए थे। अब मस्जिद के नीचे कुआ मिलने के बाद विकास त्यागी ने दावा किया है कि यह कुआ इस बात की गवाही देता है कि जहां मस्जिद बनाई गई थी वहां देवस्थान रहा हो। विकास त्यागी का कहना है कि जिस तरह से कुआ मिला है अब उन्हे उम्मीद है कि वहां कोई देव स्थान होने के सबूत भी मिल सकते हैं। विकास त्यागी ने अब और अधिक गहनता और जिम्मेदारी से कुएं की जांच कराए जाने की मांग की है।
जमीयत उलेम-ए-हिंद के अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य मौलाना महमूद मदनी ने कहा है कि यह कार्रवाई न्याय के मूल सिद्धांतों और न्यायिक मूल्यों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा है कि कोई पक्ष अपने ही मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता। प्रशासन ने इस मामले में एक तरफा कार्रवाई की है। यह कार्रवाई न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। न्यायालय ने जो निर्णय दिया है उसमें मस्जिद को तुरंत ध्वस्त करने का कोई आदेश नहीं था लेकिन प्रशासन ने ऐसा किया। उन्होंने कहा कि निर्णय की प्रमाणित कॉपी उपलब्ध कराए जाने के कुछ ही घंटों बाद मस्जिद ध्वस्त कर देना उचित नहीं है। इसलिए इस मामले में मस्जिद पक्ष को बिना देरी किए हाइकोर्ट जाना चाहिए।
अब इस मामले में बयानबाजी शुरू हो गई है। महमूद मदनी कार्रवाई को गलत बता रहे हैं तो पूर्व विधायक संगीत सोम ने इस कार्रवाई को सही करार दिया है। रविवार को संगीत सोम ने एक वीडियो जारी करके अपने बयान में कहा है कि प्रशासन ने किसी मस्जिद को नहीं गिराया बल्कि अदालत के आदेश का अनुपालन करते हुए अवैध अतिक्रमण को हटाया है। असदुद्दीन औवेसी के बयान पर पलटवार करते हुए संगीत सोम ने कहा कि 1911 में सहारनपुर में बिजली ही नहीं थी तो वहां पर बिजली का बिल कैसे आ गया। संगीत सोम ने इस मामले में राहुल गांधी और पूर्व सीएम अखिलेश यादव से कहा है कि इस मामले में राजनीति करके यूपी का माहौल खराब ना करें।
Updated on:
7 Sep 2026, 8:21 AM IST
Published on:
7 Sep 2026, 8:21 AM IST
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