
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी। फोटो-IANS
Mosque Demolition Case Saharanpur: कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर धर्म को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी लोगों की भावनाओं को प्रभावित कर वोट हासिल करने के लिए धर्म का इस्तेमाल करती है। अल्वी ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई की भी आलोचना की।
आध्यात्मिक फिल्म ‘हनुमान अंश’ के बारे में बात करते हुए राशिद अल्वी ने आरोप लगाया कि इस तरह की फिल्में लोगों को धार्मिक भावनाओं के जरिए प्रभावित करने और राजनीतिक लाभ हासिल करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा हैं। ‘हनुमान अंश’ फिल्म विशाल चतुर्वेदी ने लिखी और निर्देशित की है। फिल्म नीम करोली बाबा, जिन्हें महाराज जी के नाम से भी जाना जाता है, के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित है। अल्वी ने आरोप लगाया कि बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से राजनीति में धर्म को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि हर चुनाव राम मंदिर के नाम पर लड़ा जाता है।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में शनिवार सुबह मस्जिद गिराए जाने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। विपक्षी दलों ने बीजेपी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर सांप्रदायिक राजनीति को बढ़ावा देने और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक समुदाय को निशाना बनाकर कार्रवाई करने का आरोप लगाया। राशिद अल्वी ने भी इस कार्रवाई की आलोचना की और इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।
उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अल्वी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लगता है कि मस्जिदों को गिराकर दोबारा सरकार बनाई जा सकती है।
कांग्रेस नेता ने बीजेपी के ‘तुष्टीकरण’ के आरोप पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान या बांग्लादेश में मंदिर गिराए जाते हैं तो भारत में आवाज उठाई जाती है और कहा जाता है कि ऐसा नहीं होना चाहिए। अल्वी ने कहा कि मस्जिदों को गिराना भारत के मुसलमानों को नुकसान पहुंचाता है।
16 जुलाई के आदेश में उत्तर प्रदेश पब्लिक प्रिमाइसेज (एविक्शन ऑफ अनऑथराइज्ड ऑक्यूपेंट्स) एक्ट, 1972 के तहत मस्जिद को खाली कराने का निर्देश दिया गया था। आदेश में कहा गया था कि यह संरचना 315 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर बनी थी।
राशिद अल्वी ने मस्जिद गिराए जाने के कानूनी आधार पर सवाल उठाते हुए Places of Worship Act, 1991 के लागू होने और उसकी व्याख्या को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह जिला जज का फैसला है, जबकि संसद पहले ही Places of Worship Act पारित कर चुकी है। अल्वी ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट इस कानून को स्पष्ट या परिभाषित नहीं कर रहा है और इसके बावजूद जिला अदालत ने संरचना को अवैध घोषित कर उसके गिराए जाने का रास्ता साफ कर दिया।
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि लोगों के पास 100 साल पुराने दस्तावेज कहां से आएंगे। उन्होंने पूछा कि क्या भारत में बने हर मंदिर के पास भी इतने पुराने दस्तावेज मौजूद हैं। अल्वी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ऐसे दस्तावेज पेश करने चाहिए और आरोप लगाया कि यह एकतरफा फैसला है।
Updated on:
6 Sep 2026, 4:17 PM IST
Published on:
6 Sep 2026, 4:17 PM IST
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