
कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद परिसर पर चला बुलडोजर ( फोटो पत्रिका )
Mosque Demolition Case Saharanpur Update: सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद गिराए जाने के मामले में राजनीतिक और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। मौलाना साजिद रशीदी ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे संविधान पर ‘कलंक’ बताया है। साजिद रशीदी ने कहा कि जिस तरह से मस्जिद को गिराया गया, वह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने दावा किया कि उस जगह के रिकॉर्ड में आज भी याकूब खान और वहीद खान के नाम दर्ज हैं। इसके बावजूद रात के अंधेरे में लोगों को नजरबंद कर मस्जिद को गिरा दिया गया।
मौलाना साजिद रशीदी ने आरोप लगाया कि अदालत की ओर से आदेश दिए जाने के बाद SSP ने उसे तत्काल लागू कर दिया और मुसलमानों को हाईकोर्ट जाने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि संबंधित पक्ष के पास हाईकोर्ट जाने के लिए 22 दिन का समय बचा था लेकिन उसे यह अवसर नहीं दिया गया। रशीदी ने सरकार से SSP के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि सरकार ईमानदार और निष्पक्ष है तो इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मस्जिद को इसलिए गिराया गया ताकि भाजपा को राजनीतिक लाभ मिल सके। रशीदी ने कहा कि इससे मुसलमानों की आस्था को ठेस पहुंची है।
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी मौलाना यासूब अब्बास ने भी मस्जिद गिराए जाने पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि सहारनपुर की यह मस्जिद 18वीं सदी से वहां मौजूद थी। उनके मुताबिक, मस्जिद को लेकर स्टे ऑर्डर भी था, लेकिन बाद में सहारनपुर के जिलाधिकारी ने स्टे को खारिज कर दिया और बुलडोजर के जरिए मस्जिद को पूरी तरह गिरा दिया गया।
यासूब अब्बास ने कहा कि मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, इमामबाड़े और चर्च जैसी जगहें लोगों के लिए आस्था और मानसिक शांति का केंद्र होती हैं। उन्होंने दावा किया कि अब तक इस मस्जिद से किसी को कोई समस्या या शिकायत नहीं थी।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने भी सहारनपुर मस्जिद मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने हाल ही में पाकिस्तान में एक पुराने मंदिर को तोड़े जाने की घटना का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि जब वहां धार्मिक स्थल तोड़े जाने पर भारत में चिंता जताई जाती है, तो देश के भीतर ऐसी घटनाओं पर क्या रुख होना चाहिए। मनोज झा ने सवाल किया कि ऐसी घटनाओं के बीच भारत को पूरे दक्षिण एशिया में एक जीवंत लोकतंत्र होने का दावा किस आधार पर करना चाहिए।
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को प्रशासन ने सरकारी जमीन पर बना अनधिकृत ढांचा बताया था। सिटी मजिस्ट्रेट के जुलाई के आदेश में इसे सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़ा मामला माना गया था। इसके खिलाफ मस्जिद प्रबंधन की अपील को 2 सितंबर को जिला अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके बाद शनिवार सुबह मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। वहीं मस्जिद प्रबंधन की ओर से कार्रवाई की प्रक्रिया और समय को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
मस्जिद प्रबंधन की ओर से अब इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही गई है। इसी वजह से आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी लड़ाई के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी बड़ा मुद्दा बन सकता है। सहारनपुर मस्जिद मामले को लेकर पहले ही विपक्षी दलों और कई नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ चुकी हैं। अब साजिद रशीदी, यासूब अब्बास और मनोज झा के बयानों के बाद विवाद और तेज होने के संकेत हैं।
Updated on:
06 Sept 2026 02:25 pm
Published on:
06 Sept 2026 02:25 pm
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