
100 साल पुरानी इमारत अवैध कैसे? बोले- सुरेंद्र राजपूत। फोटो सोर्स-X (@Aas_MSaifi)
Mosque Demolition Case Update Saharanpur: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया है। कार्रवाई के बाद मलबा हटाने के दौरान मौके पर एक करीब 20 फीट गहरा कुआं भी मिला है। प्रशासन ने कुएं की ऐतिहासिकता और महत्व की जांच के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सूचना दी है।
मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। विपक्षी दलों ने कार्रवाई के तरीके और समय को लेकर योगी सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी दल JDU ने नियमों के उल्लंघन की स्थिति में प्रशासनिक कार्रवाई को उचित बताया है।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने लखनऊ में सहारनपुर की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि करीब 100 साल पुरानी किसी इमारत को सीधे तौर पर अवैध नहीं कहा जा सकता। उन्होंने दावा किया कि प्रभावित पक्ष को सुप्रीम कोर्ट जाने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि संविधान लोगों को न्याय पाने का अधिकार देता है और संबंधित पक्ष को उच्च अदालत में जाने का मौका मिलना चाहिए था। कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि रात के अंधेरे में प्रशासन के इशारे पर मस्जिद को गिराया गया। उन्होंने इसे हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण और सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने की कोशिश बताया।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान का समर्थन करते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों और धार्मिक स्थलों को निशाना बना रही है। फखरुल हसन ने कहा कि निचली अदालत से फैसला आने के बाद प्रभावित पक्ष को ऊपरी अदालत में जाने का मौका दिया जाना चाहिए था।
उन्होंने सवाल उठाया कि कार्रवाई में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई। SP प्रवक्ता ने सहारनपुर की घटना को ‘कलंक’ बताते हुए आरोप लगाया कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले धार्मिक स्थल को गिराया गया।
वहीं, केंद्र की सहयोगी पार्टी JDU ने सहारनपुर प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन किया है। पटना में JDU के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कहा कि अगर नियमों का उल्लंघन करके मस्जिद, मंदिर या चर्च बनाया जाता है तो सरकार को संविधान और कानून के मुताबिक कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्माण के मामले में धार्मिक आस्था से ऊपर कानून को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके मुताबिक, अगर कोई निर्माण नियमों के खिलाफ है तो प्रशासन को कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई का अधिकार है।
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को प्रशासन ने सरकारी जमीन पर बना अनधिकृत ढांचा बताया था। मामले में सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ मस्जिद प्रबंधन ने जिला अदालत का रुख किया था। जिला अदालत ने अपील खारिज करते हुए पहले के आदेश को बरकरार रखा, जिसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। प्रशासन के मुताबिक, कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
मस्जिद के मलबे को हटाने के दौरान रविवार को जमीन के नीचे एक कुआं मिला। अधिकारियों के मुताबिक, कुआं करीब 20 फीट गहरा और लगभग 1.5 मीटर चौड़ा है। मौके पर एक स्लैब दिखाई देने के बाद उसे हटाया गया, जिसके नीचे कुआं मिला। प्रशासन ने इसकी उम्र और ऐतिहासिक महत्व का पता लगाने के लिए ASI को जांच के लिए बुलाया है। अधिकारियों का कहना है कि विशेषज्ञों की जांच के बाद ही कुएं के इतिहास को लेकर कोई निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।
सहारनपुर मस्जिद मामले में मुख्य राजनीतिक विवाद अब दो सवालों के आसपास केंद्रित है—पहला, मस्जिद को हटाने की कानूनी प्रक्रिया और दूसरा, ध्वस्तीकरण के समय को लेकर उठ रहे सवाल। विपक्षी दल इसे धार्मिक और राजनीतिक मुद्दे के तौर पर उठा रहे हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत में चली प्रक्रिया और सरकारी जमीन से अनधिकृत कब्जा हटाने से जुड़ी थी। मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद सामने आए कुएं ने भी मामले को नया मोड़ दे दिया है। अब इसकी ऐतिहासिकता को लेकर ASI की जांच के बाद ही स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
Updated on:
6 Sep 2026, 3:39 PM IST
Published on:
6 Sep 2026, 3:39 PM IST
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