
मुजफ्फरनगर दंगा केस में BJP नेताओं को राहत (X Photo Narendra Pratap)
BJP 25 Leaders Relief: मुजफ्फरनगर दंगा से जुड़े 2013 के एक मामले में बीजेपी नेताओं और हिंदू कार्यकर्ताओं को बड़ी राहत मिली है। विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के केस वापस लेने के फैसले के बाद अभियोजन की अर्जी मंजूर कर ली। इस मामले में मंत्री कपिल देव अग्रवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, पूर्व राज्य मंत्री सुरेश राणा समेत 25 लोग आरोपी थे। इन पर नगला मडोर में हुई महापंचायत के दौरान प्रशासन की पाबंदी तोड़ने, सरकारी कर्मचारियों के काम में रुकावट डालने और भाषणों के जरिए सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने के आरोप थे।
अभियोजन अधिकारी राहुल सिंह के मुताबिक, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और एमपी-एमएलए कोर्ट के जज देवेंद्र कुमार फौजदार ने बुधवार को अभियोजन की अर्जी मंजूर की। यह अर्जी उत्तर प्रदेश सरकार के मामले को वापस लेने के फैसले के बाद अदालत में दाखिल की गई थी। इस फैसले के बाद इस मामले में आरोपी बनाए गए 25 BJP नेताओं और हिंदू कार्यकर्ताओं के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ेगी।
मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री कपिल देव अग्रवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और पूर्व राज्य मंत्री सुरेश राणा आरोपी थे। इनके अलावा पूर्व उत्तर प्रदेश मंत्री अशोक कटारिया, पूर्व बीजेपी सांसद भारतेंदु सिंह और सोहनवीर सिंह के नाम भी आरोपियों में शामिल थे। पूर्व बीजेपी विधायक अशोक कंसल और उमेश मलिक के अलावा वीएचपी नेता साध्वी प्राची और डासना शिव मंदिर के नरसिंहानंद समेत कई अन्य लोगों पर भी मुकदमा दर्ज था। अब कोर्ट की मंजूरी के बाद इन 25 आरोपियों के खिलाफ इस मामले में मुकदमा आगे नहीं चलेगा।
मामला 31 जुलाई 2013 को नगला मडोर में आयोजित एक महापंचायत से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, उस दौरान निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद महापंचायत आयोजित की गई थी। आरोपियों पर सरकारी कर्मचारियों के काम में रुकावट डालने और भाषणों के जरिए सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने के आरोप लगाए गए थे। अभियोजन अधिकारी राहुल सिंह ने बताया कि इन्हीं आरोपों को लेकर सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चल रहा था। अब सरकार के केस वापस लेने के फैसले के बाद अदालत ने अभियोजन की अर्जी को मंजूरी दे दी है।
मुजफ्फरनगर में 2013 में हुए दंगे और इसके बाद आसपास के जिलों में हुई हिंसा का असर काफी लंबे समय तक रहा था। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दंगों और इसके बाद हुई हिंसा में 60 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। वहीं 40,000 से ज्यादा लोगों को अपना घर छोड़कर विस्थापित होना पड़ा था। अब इसी दंगे से जुड़े 2013 के एक मामले में विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने सरकार के फैसले के बाद केस वापस लेने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद मामले में आरोपी बनाए गए बीजेपी नेताओं और हिंदू कार्यकर्ताओं को कानूनी राहत मिली है।
Updated on:
13 Aug 2026 02:44 pm
Published on:
13 Aug 2026 01:34 pm
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