
Muzaffarnagar Bonded Laborers Rescued: मुजफ्फरनगर के मंडी गांव स्थित एक डिस्पोजेबल बाउल फैक्ट्री से 12 बंधुआ मजदूरों को छुड़ाए जाने के कुछ दिन बाद पीड़ितों ने पुलिस और डॉक्टरों को अपनी आपबीती सुनाई है। मजदूरों का आरोप है कि उन्हें महीनों तक फैक्ट्री के अंदर कैद रखकर लोहे की रॉड और भाले जैसे हथियारों से पीटा जाता था। फैक्ट्री से भागने से रोकने के लिए पिटबुल नस्ल के कुत्तों का पहरा लगाया गया था।
टिटावी थाना क्षेत्र में स्थित फैक्ट्री पर पुलिस की कार्रवाई के दौरान सभी मजदूरों को मुक्त कराया गया। फिलहाल सभी का इलाज चल रहा है और उन्हें मनोवैज्ञानिक परामर्श भी दिया जा रहा है। पुलिस मजदूरों के उस आरोप की भी जांच कर रही है, जिसमें कहा गया है कि नवंबर 2025 में अर्जुन नाम के एक अन्य मजदूर की हत्या कर शव को कहीं फेंक दिया गया था।
बताया जा रहा है यह मामला तब सामने आया जब राजस्थान के जोधपुर जिले का एक मजदूर फैक्ट्री की दीवार फांदकर भागने में सफल रहा और पुलिस तक पहुंच गया। इसके बाद पुलिस ने फैक्ट्री में छापा मारकर 12 मजदूरों को मुक्त कराया।
मजदूरों ने जांच अधिकारियों को बताया कि उन्हें रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक स्थानों से नौकरी, नियमित वेतन, भोजन और रहने की सुविधा का लालच देकर मुजफ्फरनगर लाया गया था। फैक्ट्री पहुंचने के बाद उनके मोबाइल फोन छीन लिए गए, पहचान संबंधी दस्तावेज नष्ट कर दिए गए और महीनों तक परिवार से संपर्क नहीं करने दिया गया।
उत्तराखंड के नैनीताल निवासी रामू (बंधुआ मजदूर) ने बताया कि करीब ढाई महीने पहले उन्हें नौकरी का झांसा देकर यहां लाया गया था। उन्होंने कहा कि उन्हें फैक्ट्री से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी। खाने में चोकर मिली सूखी रोटियां दी जाती थीं। किसी से गलती हो जाए या कोई सवाल पूछ ले तो लोहे की रॉड से पीटा जाता था और कई बार भाले से भी घायल किया जाता था।
रामू ने कहा कि हर समय डर बना रहता था क्योंकि पता नहीं कब छोटी-सी बात पर भी मारपीट शुरू हो जाए।
उत्तर प्रदेश के औरैया निवासी शिवम कुमार ने अपने शरीर पर चोट के निशान दिखाते हुए महीनों तक कैद में रहने की बात कही। वहीं सीतापुर निवासी जगदीश ने बताया कि जब भी घर जाने की बात करते थे, उन्हें प्रताड़ित किया जाता था। उन्होंने कहा कि 11 महीने तक परिवार से बात नहीं हो सकी और एक समय ऐसा लगा कि शायद अब कभी अपनों से मुलाकात नहीं होगी।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर निवासी नारायण ने बताया कि उन्हें पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से यहां लाया गया था। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा छुड़ाए जाने के बाद ऐसा लगा जैसे उन्हें दूसरी जिंदगी मिल गई हो।
शिवम की मां रानी ने बताया कि उनका बेटा गुरुग्राम काम करने गया था। वह पहले कुछ महीने काम करने के बाद घर लौट आता था, लेकिन जनवरी के बाद उससे पूरी तरह संपर्क टूट गया। परिवार लगातार उसकी तलाश करता रहा। दो दिन पहले टिटावी थाना पुलिस का फोन आने पर ही पहली बार उससे बात हो सकी।
मजदूरों की मेडिकल जांच करने वाले सरकारी अस्पताल के डॉक्टर दीपांकर कुमार ने बताया कि कई मजदूरों के शरीर पर पुराने चोट के निशान मिले हैं। उन्होंने कहा कि प्रताड़ना का मानसिक असर भी काफी गहरा दिखाई दे रहा है और दो मजदूरों में गंभीर मानसिक आघात के संकेत मिले हैं।
SSP संजय कुमार वर्मा ने कहा कि मेडिकल जांच में मजदूरों के शरीर पर कई चोटों के निशान पाए गए हैं।
पुलिस ने शिवा त्यागी और प्रदीप बालियान को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान फरार है। पुलिस के अनुसार अब जांच अवैध कैद, बंधुआ मजदूरी, मारपीट, मजदूरी का भुगतान न करना, दस्तावेज नष्ट करना, धमकाने, मजदूरों के पुनर्वास और अर्जुन की कथित हत्या के आरोपों तक विस्तारित कर दी गई है। पुलिस लापता लोगों के रिकॉर्ड भी खंगाल रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर शव कहां फेंका गया था।