दस सालों में जितने हाईप्रोफाइल मामले सीबीआई को सौंपे गए, उनके अनुसंधान में अभी तक कोई महत्वपूर्ण परिणाम सामने नहीं आ पाए हैं...
(पत्रिका ब्यूरो,पटना): मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में नाबालिग लड़कियों से दुष्कर्म के मामले को लेकर पूरे सूबे में कोहराम मचा हुआ है। विपक्ष लगातार इस मामले में सीबीआई से जांच करवाने की मांग कर रहा था। इस मामले में खुद पर सवाल उठता देख सरकार ने सीबीआई जांच के आदेश दे दिए है और सीबीआई कार्रवाई में भी जुट गई है। यदि पिछले मामलों पर नजर डाले तो यह देखने में आता है कि सीबीआई अपनी विश्वसनीय छवि नहीं बना पाई है। सीबीआई को पिछले दस वर्षों में नौ मामले अनुसंधान को दिए। इनमें से छः मामले हत्या से जुड़े थे। जितने हाईप्रोफाइल मामले सीबीआई को सौंपे गए, उनके अनुसंधान में अभी तक कोई महत्वपूर्ण परिणाम सामने नहीं आ पाए हैं। ऐसे में यह सवाल खडे हो रहे है कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड की सीबीआई की जांच में उचीत और सटीक नतीजे सामने आएंगे या अन्य मामलों की तरह इस बार भी सीबीआई फिसड्डी साबित होगी।
पत्रकार राजददेव रंजन हत्याकांड
पत्रकार और एक अखबार के सिवान ब्यूरो प्रमुख राजदेव रंजन हत्याकांड में सीबीआई ने चार्जशीट बेशक दायर कर दी है, पर अभी तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं ला सकी है। हत्या के आरोप आरजेडी के बाहुबली नेता शहाबुद्दीन पर लगे हैं।
नवरूणा हत्याकांड
14 वर्षीया दसवीं की छात्रा नवरूणा की हत्या 18 दिसंबर 2012 को कर दी गई। एक साल बाद सीबीआई ने केस हाथ में लिया। 26 नवंबर 2013 को मुजफ्फरपुर स्थित उसके घर के पास नाले में उसका कंकाल बरामद किया गया। आज तक रहस्य अनसुलझा।
संतोष टेकरीवाल हत्याकांड
11 साल पूर्व पटना के शास्त्रीनगर थाना इलाके से डीएवी छात्र के अपहरण के मामले को भी सीबीआई आज तक नहीं सुलझा पाई है।
गौतम हत्याकांड
पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता के पुत्र गौतम हत्याकांड में भी 2012 से अब तक सीबीआई किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
भूटन सिंह हत्याकांड
वर्ष 2000 में पूर्णिया कोर्ट परिसर में जदयू नेता भूटन सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। सीबीआई आज तक हत्यारे की तलाश नहीं कर पाई है।
ब्रम्हेश्वर मुखिया हत्याकांड
एक जून 2012 को आरा में रणवीर सेना के बहुचर्चित संस्थापक ब्रम्हेश्वर मुखिया की गोली मारकर हत्या कर दी गई। सीबीआई आज तक नतीजे पर नहीं पहुंच पाई।
जमुई मूर्ति चोरी
जमुई से 2015 में भगवान महावीर की बेशकीमती मूर्ति चोरी किए जाने के मामले में भी सीबीआई अब तक फिसड्डी ही साबित हुई है।