अनदेखी का दंश : आरटीडीसी की होटलें एवं कैफेटेरिया पर लगे ताले, प्रदेश में 70 में से 28 इकाइयां ही संचालित, लगातार बंद हो रही हैं इकाइयां, होटलें हो रही खंडहर
नागौर. सुंदर परदेसी पक्षी ‘कुरजां’ के नाम से नागौर में राजस्थान पर्यटन विकास निगम (आरटीडीसी) की ओर से बनाई गई होटल पिछले 21 साल से बंद है। राजस्थान के देसी लोक जीवन का अहम हिस्सा रही कुरजां को कभी गीतों में गाया गया तो कभी नायक-नायिका के प्रेमालाप का माध्यम बनाया। कभी आतिथ्य के प्रतीक के रूप में भी मेरा नामकरण हुआ। राजस्थानी लोकगीतों में कुरजां का जितना सुंदर, मनोहारी और शृंगारिक चित्रण हुआ है, नागौर में कुरजां के नाम से बनी आरटीडीसी की होटल वर्तमान में उतनी ही ‘कुरूप’ और ‘बदहाल’ है। केवल नागौर ही नहीं, प्रदेश में करोड़ों रुपए खर्च कर बनाई गई ऐसी 39 इकाइयां निगम की उदासीनता एवं अरुचि के कारण धूल फांक रही हैं।
प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने व पर्यटकों के ठहराव के लिए आरटीडीसी की ओर से संचालित कुरजां जैसी कई होटलें बदहाल हैं। एक जमाने में विदेशी पर्यटकों से गुलजार रहने वाली होटलें अब खंडहरों में तब्दील हो रही हैं तो कहीं नागौर की ‘कुरजां’ जैसे हाल में है। निगम कभी प्रदेशभर में 70 होटल, कैफेटेरिया, यात्रिका व जनता आवास गृह का संचालन करता था, इनमें से 39 को घाटे में बताकर बंद कर दिया गया। इनमें 19 इकाइयां पिछले 15 साल में बंद की गई हैं। 10 इकाइयां तो वर्ष 2017 में तथा चार इकाइयां वर्ष 2021 में बंद की गईं।
गौरतलब है कि प्रदेश में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने एवं प्राचीन व ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए आरटीडीसी काम करता है। देश का राजस्थान पहला ऐसा राज्य है, जिसने 4 मार्च 1989 को पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया था।
दिन में नशेड़ी और रात में मवेशी
नागौर की कुरजां होटल का संचालन पिछले 21 साल से बंद है। कमरों में जहां पर्यटक ठहरने चाहिए, वहां पक्षियों ने घोंसले बना लिए और मवेशी बैठे रहते हैं। देखरेख के अभाव में लोग होटल भवन के दरवाजे, खिड़कियां व कमरों का फर्नीचर आदि तोडकऱ ले गए। अब तो यहां स्मैकची भी डेरा डाले रहते हैं। इसके कारण नागौर आने वाले पर्यटकों को मजबूरी में महंगे होटलों में रुकना पड़ता है।
सरकार ने किया 5 हजार करोड़ का प्रावधान
राज्य सरकार ने पिछले साल बजट में राजस्थान टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर एंड केपेसिटी बिल्डिंग फंड बनाया। इसके तहत राज्य के हेरिटेज पर्यटन, धार्मिक पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन, इको-पर्यटन एवं साहसिक पर्यटन के विकास, प्रदेश की ब्रांडिंग तथा पर्यटकों की सुविधा के लिए 5 हजार करोड़ रुपए की घोषणा की थी।
आरटीडीसी की इन होटलों का हो रहा है संचालन
आरटीडीसी की ओर से प्रदेश में 28 होटल/मिडवे का संचालन किया जा रहा है, जिसमें जयपुर में होटल गणगौर, होटल स्वागतम व होटल तीज, अजमेर में होटल खादिम, पुष्कर में होटल सरोवर, पाली में होटल पनिहारी व होटल शिल्पी रणकपुर, उदयपुर में होटल कजरी, चित्तौडगढ़़ में होटल पन्ना, राजसमंद में होटल गोकुल नाथद्वारा, कोटा में होटल चम्बल, सवाईमाधोपुर में होटल विनायक व होटल झूमर बावड़ी, सिरोही में होटल शिखर माउण्अ आबू, भरतपुर में होटल फोरेस्ट लॉज, अलवर में होटल टाइगर डेर सरिस्का, होटल मीनल व होटल लेक पैलेस सिलीसेढ़, बीकानेर में होटल ढोलामारू, जोधपुर में होटल घूमर, जैसलमेर में होटल मूमल व होटल समढाणी का संचालन हो रहा है। इसी प्रकार झालावाड़ में होटल गावड़ी तालाब, भरतपुर में होटल सारस, सीकर में होटल हवेली फतेहपुर, पाली में मिडवे बर, डूंगरपुर में मिडवे रतनपुर एवं जयपुर में कैफेटेरिया पड़ाव नाहरगढ़ का संचालन किया जा रहा है।
ये लाइसेंस फीस पर संचालित
कैफेटेरिया सरोवर माउण्ट आबू, कैफेटेरिया अपोलो माउण्ट आबू व कैफेटेरिया गढ़ीसर जैसलमेर का संचालन लाइसेंस फीस पर किया जा रहा है।
प्रदेश में इन होटल इकाइयों को कर दिया बंद
इकाई का नाम - संचालन बंद का वर्ष
जनता आवास गृह, चित्तौडगढ़़ - 1984
होटल पुर्जन निवास, माउण्ट आबू - 1991
होटल भीलवाड़ा - 2005
होटल हनुमानगढ़ - 2001
होटल कुरजां, नागौर - 2004
होटल खड़ताल, बाड़मेर - 2005
होटल गवरी ऋषभदेव, उदयपुर - 2017
होटल वृन्दावती, बूंदी - 2017
होटल झील पर्यटक ग्राम, रामगढ़, जयपुर - 2017
होटल चंद्रावती, झालावाड़ - 2017
होटल झुंझुनूं - 2017
होटल रॉयल ट्यूरिस्ट विलेज गनहेड़ा, पुष्कर - 2012
होटल पर्यटक ग्राम पुष्कर - 2017
होटल चिरमी, चूरू - 2013
होटल जयसमंद, उदयपुर - 2021
होटल रेस्ट हाउस हल्दीघाटी, राजसमंद - 2021
मिडवे सीकर - 1995
मिडवे मेड़ता, नागौर - 1998
मिडवे फलौदी - 2013
मिडवे बाप, जोधपुर - 2000
मिडवे देचू, जोधपुर - 2000
मिडवे, धौलपुर - 2017
मिडवे शाहपुरा, जयपुर - 2017
मिडवे, दौसा - 2017
मिडवे देवगढ़, राजसमंद - 2017
मिडवे पिण्डवाड़ा, सिरोही - 2021
मिडवे गोगुन्दा, उदयपुर - 2021
मिडवे बालोतरा, बाड़मेर - 2022
मिडवे बहरोड़, अलवर - 2023
मिडवे देवली, टोंक - 2000
मिडवे डीग, भरतपुर - 2006
मिडवे ओसियां, जोधपुर - 2000
कैफेटेरिया महेन्सर, झुंझुनूं - 1989
कैफेटेरिया मण्डावा, झुंझुनूं - 1989
कैफेटेरिया तालवृक्ष, अलवर - 2005
कैफेटेरिया मेनाल, चित्तौडगढ़़ - 2006
यात्रिका कैलादेवी, करौली - 1999
यात्रिका सालासर, चूरू - 2000
यात्रिका नाथद्वारा, राजसमंद - 2014