
-खाली पदों के अभाव में रोडवेज की स्थिति हो रही खराब, चालन, परिचालन सहित विभिन्न शाखाओं में काम हुआ प्रभावित
नागौर. डबल इंजन की सरकार बनने के बाद से राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम में खाली पदों का सूखा समाप्त होने की उम्मीद बढ़ी है। पिछले कई सालों से चालक, परिचालक, निरीक्षक सहित तकनीकी संवर्ग सहित अधिकारियों की कमी से प्रदेश के रोडवेज की स्थिति बिगड़ी है। स्थिति यह हो गई है कि विभाग के वर्कशॉप में बसों के रखरखाव और इनकी मरम्मत तक करने के लिए कर्मचारी नहीं है। इसकी वजह से बसों की संचालन व्यवस्था पूरी तरह से प्रभावित हुई है। विभाग में इस समय साढ़े नौ हजार से ज्यादा खाली पद चल रहे हैं। हालांकि प्रबंधनतंत्र की ओर से पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में रोडवेज में खाली पदों की भर्ती के लिए प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन सरकार ने मंजूरी नहीं दी थी। चुनाव के बाद अब नई सरकार के आने से रोडवेज के अधिकारियों एवं यूनियन प्रतिनिधियों को नई सरकार से आस बंधी है।
राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के 52 आगारों में इस समय नौ हजार से ज्यादा पद खाली चल रहे हैं। इसमें अधिकारिक वर्ग के करीब ढाई हजार, डेढ़ हजार से ज्यादा परिचालक एवं साढ़े तीन हजार से ज्यादा तकनीकी संवर्ग के पद खाली चल रहे हैं। इन खाली पदों की वजह से रोडवेज के आगारों की स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। सर्वाधिक खाली पद तकनीकी संवर्ग के हैंं। जानकारों के अनुसार तकनीकी संवर्ग के खाली पदों पर नियुक्तियां नहीं होने के कारण प्रदेश के डिपों की कार्यशाला में बसों की सार-संभाल तक नहीं हो पा रही। इसी तरह अन्य सवंर्गों में खाली पदों की वजह से निरीक्षण, बसों के संचालन आदि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। बताते हैं कि खाली पदों पर भर्तियां हुई तो तो फिर चालन, परिचालन, लेखा, कम्प्यूटर कार्य सहित यात्रियों को टिकट दिए जाने के कार्य गति आने के साथ ही बसों के रखरखाव व मरम्मत आदि की स्थिति सुधार होने से राजस्व में भी खासी बढ़ोत्तरी होगी।
प्रदेश के रोडवेज में खाली पदों के आंकड़ों पर एक नजर
प्रदेश रोडवेज में कुल पदों की संख्या- 22348
प्रदेश रोडवेज में कुल खाली पदों संख्या-12525
अधिकारिक वर्ग में खाली पदों की संख्या-2442
निरीक्षकों के खाली पदों की संख्या-399
परिचालकों के खाली पदों की संख्या-1575
चालकों के कुल खाली पदों की संख्या-355
तकनीकी वर्ग में खाली पदों की संख्या-3697
खाली पद भरे तो फिर सुधरेगी रोडवेज की सेहत
बसों के शिड्यूल तक निरस्त हो जाते हैं
चालकों की ड्यूटी बस चालन में लगनी चाहिए, लेकिन उनके वर्कशॉप सरीखी तकनीकी जगहों पर काम करने का सीधा असर रोडवेज की पूरी व्यवस्थाओं पर पड़ा है। बसों के मरम्मत की जिम्मेदारी मिस्त्री पर रहती है, लेकिन यहां पर मिस्त्रियों के पदों के खाली होने की वजह से कई जगहों पर चालकों एवं परिचालकों को यह जिम्मेदारी भी निभानी पड़ रही है। जानकारों की माने तो सीकर, कोटा, उदयपुर, जोधपुर, जैसलमेर, श्रीगंगानगर, सवाईमाधोपुर, प्रतापगढ़, सिरोही एवं राजधानी जयपुर में भी रोडवेज संघर्ष कर रहा है। इसके चलते कई बार बसों के शिड्यूल तक निरस्त करने पड़ रहे हैं।
इनका कहना है...
रोडवेज में खाली पदों का प्रस्ताव पूर्व में भेजा चुका है। आवश्यकतानुसार इसको नए सिरे से भी भेज दिया जाएगा। अभी तो सरकार ने कार्ययोजना मांगी है, लेकिन उम्मीद है कि रोडवेज के लिए बेहतर काम होने की पूरी उम्मीद है।
नथमल डिडेल, प्रबन्ध निदेशक, राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम