25 वर्ष से सूखे का दंश झेल रही लूनी नदी के किनारे पर रहने वाले लोगों के लिए बुधवार का दिन सुकून लेकर आया जब आनासागर का पानी लाडपुरा में प्रवेश हुआ जहां से लूनी नदी का उदगम शुरू होता है
आलनियावास. 25 वर्ष से सूखे का दंश झेल रही लूनी नदी के किनारे पर रहने वाले लोगों के लिए बुधवार का दिन सुकून लेकर आया जब आनासागर का पानी लाडपुरा में प्रवेश हुआ जहां से लूनी नदी का उदगम शुरू होता है। अजमेर के नाग पहाडिय़ों से निकल कर गोविंदगढ़ तक यह नदी सरस्वती कहलाती है। यह पानी ग्राम पंचायत क्षेत्र के कालनी के पास गुरुवार सुबह पहुंचा। नदी आने की सूचना मिलते ही सैकड़ों ग्रामीण स्वागत के लिए मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने डीजे बजा कर खुशियां जताई। ग्राम के देवीलाल कुमावत, गोगाराम, कालूराम, जगदीश, मदनलाल, प्रभु राम, प्रकाश, तेजाराम, पांचाराम, ओम प्रकाश वैष्णव सहित कई ग्रामीणों और महिलाओं ने मौके पर लूनी नदी की विधिवत पूजा की और चुनरी ओढ़ाकर नदी का सम्मान किया। वर्षों बाद नदी में पानी की आवक देख लोगों की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा।
युवाओं ने पहली बाद देखा नदी में पानी
भावी पीढ़ी ने तो नदी में पानी की आवक पहली बार ही देखी क्योंकि इससे पहले 1994 में नदी में पानी की आवक हुई थी उसके बाद लूनी नदी की बदहाल स्थिति देखने को मिली लेकिन इस बार इंद्रदेव की मेहरबानी से प्रदेश भर में अच्छी बारिश होने के साथ लूनी नदी में पानी की आवक होने से किसानों के चेहरों की चमक दोगुनी हो गई। लोगों को उम्मीद है कि लूनी नदी में बजरी खनन से खोदे गए गड्ढों में पानी भर गया और नदी में पानी की आवक होने से वर्षो से बंद कुओं में फिर से पानी मिलने की उम्मीद जगी है। लगातार बारिश कम होने और नदी में पानी की आवक नहीं होने से क्षेत्र के आसपास गांव में जल स्तर तेजी से गिर गया जिससे लोगों के पीने के लिए पानी लाना भी मुश्किल हो गया हालात यह थे कि कुएं पर रहने वाले लोगों को भी टैंकर से पानी मंगवाना पड़ता था। लेकिन वर्षों बाद लोगों को नदी में पानी देखने को मिला किसानों को राहत मिली कि अब कुओं में जलस्तर बढ़ेगा। और खेती बाड़ी अच्छी होगी। पशुधन भी आराम से पाल सकेंगे। आलनियावास रपट से पानी आगे बढ़ रहा है। गड्डे गहरे होने के कारण पानी को आगे बढऩे में समय लग रहा है। नदी में पानी की आवक देख युवाओं ने नहाने का आनंद भी लिया।